Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

पानी, प्रकृति और परिवर्तन के 50 साल,तरुण भारत संघ का स्वर्ण जयंती समारोह 30 मई को भीकमपुरा में

भीकमपुरा (अलवर), 10 मई। जल संरक्षण और ग्रामीण सशक्तिकरण के क्षेत्र में पांच दशक से अधिक समय से कार्यरत तरुण भारत संघ (TBS) अपना स्वर्ण जयंती वर्ष 30 मई 2025 को पूर्ण कर रहा है। इस उपलक्ष्य में एक विशेष समारोह का आयोजन तरुण आश्रम, भीकमपुरा, अलवर (राजस्थान) में किया जाएगा।

इस आयोजन में देशभर से तरुण भारत संघ के पुराने साथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों और दानदाताओं के शामिल होने की संभावना है। इसे संस्था के कार्य से जुड़े लोगों का एक आत्मीय पारिवारिक मिलन माना जा रहा है।

तरुण भारत संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने बताया कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि एक ऐसा अवसर होगा जहाँ संगठन से वर्षों से जुड़े साथी अपने अनुभव साझा करेंगे और भावी योजनाओं पर संवाद करेंगे। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि इस अवसर पर साथी अपने अनुभवों के साथ आएं, और हम सब मिलकर आगे की दिशा तय करें। बीते पचास वर्षों में जिन 23 नदियों का पुनर्जीवन हुआ है, उनकी बहती हवाएं हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगी।”

तरुण भारत संघ ने बीते पाँच दशकों में सामुदायिक भागीदारी से राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में कई जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया है। विशेष रूप से सूख चुकी या लुप्त हो चुकी 23 नदियों के पुनर्जीवन का कार्य एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जाता है। यह संस्था का प्रयास ही था जिसने जल संकट झेल रहे अनेक गांवों में जीवन को फिर से बहता हुआ बनाया।

समारोह में जल, जंगल और ज़मीन के संरक्षण से जुड़े अनुभवों और रणनीतियों पर संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ जैसी गतिविधियाँ शामिल होंगी। साथ ही भविष्य में पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए संगठन की आगामी दिशा पर भी विचार किया जाएगा।

See also  वर्ष 2021 के प्रतिष्ठित "ग्लोबल एनर्जी अवॉर्ड" से तरुण भारत संघ सम्‍मानित

Table of Contents

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया

लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी

Read More »

सोनम वांगचुक :  अनशन नहीं, सत्ता का चरित्र बदला है

सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब केवल शिक्षा सुधार या एक मंत्री की जवाबदेही का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिरोध की प्रभावशीलता की भी परीक्षा बन चुका है। इसी बीच न्यायालय ने उनके जीवन की रक्षा को

Read More »

यात्रा-वृत्तांत : अनोखी है बैतूल की भू-संस्कृति

भारत की विविध भू-संस्कृतियों की खोज में बैतूल एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ प्रकृति, लोकजीवन, आस्था और सामुदायिक संस्कृति एक-दूसरे में सहज रूप से घुली-मिली दिखाई देती हैं। यह यात्रा-वृत्तांत एक शोधार्थी की आँखों से बैतूल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक

Read More »