सतत जीवन शैली : आज की ज़रूरत, कल का भविष्य—डॉ. जनक पलटा मगिलिगन

इंदौर, 19 अप्रैल। “सतत जीवनशैली अब विकल्प नहीं, बल्कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हमें अपनी जीवनशैली में बदलाव लाते हुए जल, ऊर्जा और संसाधनों का संरक्षण करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।” यह विचार पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने अपने दिवंगत पति जिम्मी मगिलिगन की 14वीं पुण्यतिथि के अवसर पर व्‍यक्‍त किये। वे आज श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस द्वारा सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला ‘सस्टेनेबल लिविंग’ पर वक्‍ता के तौर पर बोल रही थी।

जिम्मी मगिलिगन की स्मृति में सतत सेवा का संकल्प

डॉ. पलटा ने अपने जीवनसाथी जिम्मी मगिलिगन के साथ किए गए कार्यों को साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने इंदौर के बरली डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट फॉर रूरल वुमेन को सतत विकास का अंतरराष्ट्रीय मॉडल बनाया। जिम्मी ने भारत में 25 वर्षों तक बहाई पायनियर के रूप में काम करते हुए मध्य भारत में पहला सोलर किचन स्थापित किया, जो प्रतिदिन 150 लोगों का भोजन तैयार करता है और हर महीने 9 गैस सिलेंडरों की बचत करता है।

सौर ऊर्जा और जीरो वेस्ट मॉडल की पहल

उन्होंने झाबुआ, धार और इंदौर के आश्रमों में सामुदायिक सोलर किचन विकसित किए और 500 से अधिक सोलर कुकर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाए। सनावदिया गांव में उन्होंने अपने घर से पहले सौर व पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया, जो दिसंबर 2010 से 50 आदिवासी परिवारों को मुफ्त बिजली दे रहा है।
डॉ. पलटा अब तक 1.83 लाख से अधिक लोगों को सतत जीवनशैली का प्रशिक्षण दे चुकी हैं और हर वर्ष एक सप्ताह पूरी तरह सस्टेनेबल स्किल्स को समर्पित करती हैं।

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जीवनशैली में सादगी और जिम्मेदारी का संदेश

अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया, “मैं केवल चाय पत्ती, नमक और जैविक गुड़ खरीदती हूं। मैं कचरा उत्पन्न नहीं करती, प्लास्टिक और रसायनों का उपयोग नहीं करती और मेरे घर में कचरा दान भी नहीं है।” उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

युवा उद्यमियों को नवाचार और स्थायित्व की प्रेरणा

कार्यक्रम में डॉ. समीर शर्मा, सीईओ, स्वाहा रिसोर्स सॉल्यूशंस ने युवाओं को पर्यावरणीय दृष्टिकोण से नवाचार और उद्यमिता अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि हम पारंपरिक सोच को पीछे छोड़, टिकाऊ और पर्यावरण-संवेदनशील व्यवसाय मॉडल को अपनाएं।”

सम्मान और सहभागिता

कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान के निदेशक डॉ. जॉर्ज थॉमस ने डॉ. जनक पलटा के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें सतत विकास की जीवंत मिसाल बताया। मंच संचालन सुश्री निधि दुबे ने किया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. दीपा कटियाल, प्राध्यापकगण, कर्मचारी और अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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