Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

स्मितु कोठारी फ़ेलोशिप 2024 के लिए आवेदन आमंत्रित

नईदिल्‍ली । सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकॉउंटेबिलिटी द्वारा सातवीं स्मितु कोठारी फ़ेलोशिप 2024 के लिए आवेदन आमंत्रित किये जा रहे है। संस्‍थान पिछले 7 वर्षों से स्मितु कोठारी फ़ेलोशिप प्रदान करता आ रहा है। इस फेलोशीप का मकसद महिलाओं, दलितों, मुसलमानों, वंचित समुदायों और क्षेत्रीय भाषाओं में लिखने वाले स्वतंत्र लेखकों/शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करना है। इस वर्ष  2 महीने की अवधि के लिए 5 फेलोशिप दी जाएंगी।

सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकॉउंटेबिलिटी के प्रमुख जो अत्‍यालि ने बताया कि स्मितु कोठारी फ़ेलोशिप में इनवेस्टिगेटिव लेख, फोटो निबंध या लघु फिल्म बनाने का काम किया जा सकता है। फैलोशीप के अंतर्गत 20,000 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।

उन्‍होंने बताया कि आवेदकों के लिए पात्रता निर्धारित की गई है। 40 वर्ष से कम आयु के सभी भारतीय नागरिक, भारतीय भाषाओं के जानकार आवेदन कर सकते है। आवेदन भेजने की अंतिम तारीख 25 सितम्बर, 2024 निर्धारित की गई है। आवेदन करने के लिए संलग्‍न लिंक https://bit.ly/skf2024apply पर क्लिक कर आवदेन किया जा सकता है।

उल्‍लेखनीय है कि स्मितु कोठारी एक प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् और वरिष्‍ठ कार्यकर्ता थे, जो पारिस्थितिकी, सांस्कृतिक और मानवाधिकार के मुद्दों से जुड़े थे। अपने जीवनभर, उन्होंने सामूहिक रूप से एक ऐसा राष्ट्रीय और वैश्विक विकल्प बनाने का प्रयास किया, जो सामाजिक रूप से न्यायसंगत और पारिस्थितिक रूप से संतुलित हो।

सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी (CFA) वित्तीय संस्थानों- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय – की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण, निगरानी और समीक्षा करता है, और उनके विकास, मानवाधिकार और पर्यावरण पर प्रभावों का अध्ययन करता है, साथ ही भारत के अन्य क्षेत्रों में भी कार्यरत है।

सेंटर नागरिक समाज समूहों, सामाजिक आंदोलनों और सामुदायिक समूहों के साथ साझेदारी करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वित्तीय संस्थान पारदर्शी और जवाबदेह हों, और उन लोगों की सेवा करें जिनके लिए वे स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही, हम दक्षिण एशिया क्षेत्र पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं और वैश्विक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करने का प्रयास करते हैं, खासकर इक्कीसवीं सदी में अंतर्राष्ट्रीय वित्त के वैश्वीकरण को देखते हुए।

Table of Contents

अनशन से आगे का संघर्ष: सोनम वांगचुक से उठी एक ऐसी अपील, जिसने लोकतंत्र की आत्मा को छू लिया

लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास केवल संघर्षों का इतिहास नहीं है, बल्कि उन नैतिक दुविधाओं का भी इतिहास है, जहाँ एक ओर सिद्धांतों के लिए जीवन दांव पर लगा होता है और दूसरी ओर वही जीवन आंदोलन की सबसे बड़ी पूंजी

Read More »

सोनम वांगचुक :  अनशन नहीं, सत्ता का चरित्र बदला है

सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब केवल शिक्षा सुधार या एक मंत्री की जवाबदेही का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिरोध की प्रभावशीलता की भी परीक्षा बन चुका है। इसी बीच न्यायालय ने उनके जीवन की रक्षा को

Read More »

यात्रा-वृत्तांत : अनोखी है बैतूल की भू-संस्कृति

भारत की विविध भू-संस्कृतियों की खोज में बैतूल एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ प्रकृति, लोकजीवन, आस्था और सामुदायिक संस्कृति एक-दूसरे में सहज रूप से घुली-मिली दिखाई देती हैं। यह यात्रा-वृत्तांत एक शोधार्थी की आँखों से बैतूल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक

Read More »