Sarvodaya Press Service

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ओडिशा विधानसभा के सामने “गांधीजी की राम” पुस्तक का विमोचन

“राजनीति के चौसर का राम या गांधीजी के मर्यादा पुरुषोत्तम राम” संगोष्ठी का आयोजन

भुवनेश्वर। 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की स्थापना के दौरान गांधीवादी संगठनों की ओर से भुवनेश्वर ओडिशा विधानसभा के समक्ष महात्मा गांधी द्वारा लिखित ‘गांधी की राम’ पुस्तक का विमोचन हुआ। इस मौके पर राजनीति के चौसर का राम या गांधीजी के मर्यादा पुरुषोत्तम राम विषय पर आयोजित संगोष्‍ठी में वक्‍ताओं ने अपने विचार रखे।

जाने माने गांधीवादी विचारक डॉ. विश्वजीत की अध्यक्षता में बैठक में वक्ताओं ने कहा कि राम भारतीयों के आदर्श हैं। वह भारतीयों के दिलों में बसते हैं। महात्मा गांधी राम के सच्चे भक्त थे। जीवन भर रामायण, रामनाम, रामधुन का जाप करने वाले और रामराज्य के लिए संघर्ष करने वाले महात्मा गांधी ने गोली लगने पर भी ‘हे राम’ कहकर यह सिद्ध कर दिया कि वे राम के अनन्य भक्त थे।

संगोष्‍ठी में वक्‍ताओं ने कहा कि गांधीजी सभी धर्मों को एक ही दृष्टि से देखते थे। उन्हें अल्लाह, जीसस और राम में कोई अंतर नजर नहीं आया। जबकि भारत संविधान को मानने वाले देश के प्रधानमंत्री ने राम मंदिर की स्थापना कर राम का राजनीतिकरण करना स्वीकार्य नहीं है। धर्म एक व्यक्तिगत मामला है, इसे प्रधान मंत्री और भारतीय जनता पार्टी और अन्य हिंदूवादी संगठनों द्वारा चुनावी हथियार के रूप में उपयोग करना भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा है।

अध्यात्मिक साहित्य का लेखक पूर्णचन्द्र दास, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जस्टिस मनोरंजन महान्ति,प्रोफेसर बिरेन्द्र नायक, लोहिया एकादमी के देब प्रसाद राय, डॉ. विद्युत लता महंती, विजय कुमार त्रिपाठी, संतोष दास, सुरेश पाणिग्राही, सुशांत महापात्र, अन्तर्यामी बराल,निरुपमा पाणी, सतीश मिश्र, अशोक कुमार साहू, अनिमा राय, बिस्वजीत सुर्यबंशी, संघमित्रा जेना, संग्राम माझी, अरुण कुमार जेना  प्रमुख ने अपने विचार रखे।

बैठक के प्रारंभ में उत्कल गांधी स्मारक निधि की अध्यक्षा एवं प्रमुख गांधीवादी नेत्री कृष्णा मोहंती के नेतृत्व में सर्व धर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया। बैठक में गांधी के राम पुस्तक के अनुवादक तथा उत्कल गांधी स्मारक निधि के मंत्री जयंत कुमार दास और किताब के संपादक व उत्कल सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष मिहिर प्रताप दास ने पुस्तक पर चर्चा की। राष्ट्रीय युवा संगठन के संयोजक  सूर्य नारायण नाथ ने धन्यवाद ज्ञापन किया और मानस पटनायक ने सभा का संचालन किया।

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