Sarva Seva Sangh की 12.89 एकड़ भूमि का कब्‍जा पुन: दिलाये जाने हेतु राष्‍ट्रपति जी से की गुहार

सर्व सेवा संघ के प्रबंधक ट्रस्‍टी महादेव विद्रोही ने राष्‍ट्रपतिजी को हस्‍तक्षेप करने हेतु लिखा पत्र   

वाराणसी, 25 जुलाई। हाल ही में उत्‍तर रेलवे द्वारा बिना किसी न्यायालिक आदेश के वाराणसी स्थित सर्व सेवा संघ परिसर पर कब्जा किये जाने वाले अन्यायपूर्ण कदम के विरोध सर्व सेवा संघ के प्रबंधक ट्रस्‍टी महादेव विद्रोही ने राष्‍ट्रपति द्रोपदी मूर्म तुरंत हस्तक्षेप कर गांधी विचार की इस राष्ट्रीय संस्था को बचाने की गुहार की है।

श्री विद्रोही ने विस्‍तृत पत्र लिखकर इस मामले में रेल्‍वे द्वारा किये गये अवैधानिक कृत्‍य का सिलसिले वार ब्‍यौरा भी दिया है। उन्‍होंने पत्र में अवगत कराया कि यह परिसर आचार्य विनोबा भावे, दादा धर्माधिकारी, धीरेन्द्र मजूमदार, विमला ठकार जैसे मनीषियों की साधना भूमि रही है। वार्षिक अधिवेशनों में समय-समय पर महामहिम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आदि गणमान्‍य पधार कर सहभागी होते रहे हैं।

उन्‍होंने पत्र में कहा कि भारत के राष्ट्रपति (द्वारा:लखनऊ मंडल,उत्तर रेलवे) से  1960, 1961 एवं 1970 में 12.89 एकड़ भूमि खरीदी हैं। ये विक्रय-पत्र वाराणसी के सब-रजिस्ट्रार द्वारा निबंधित हुए हैं और क्रय राशि ट्रेजरी चालन द्वारा भारतीय स्टेट बैंक के वाराणसी शाखा में जमा किये गए हैं।

महोदव विद्रोही ने भेजे पत्र में इस बात का भी उल्‍लेख किया गया है कि उत्तर रेलवे, लखनऊ की ओर से डिवीजनल इंजीनियर श्री जी सी बेनर्जी ने इस क्रय दस्तावेज पर  हस्ताक्षर किए हैं। साथ ही इस पर रेलवे के डिवीजनल सुपरिन्टेंडेंट ने भी हस्ताक्षर किए हैं । विक्रय-पत्र (Sale Deed) के पृष्ठ पर लिखा है- Having satisfied myself that deed has been executed by Sri G C Banerjee, Divisional Engineer, Northern Railway ,Lucknow in his official capacity ……..” रेलवे विक्रय-पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए सब रजिस्ट्रार के कार्यालय में किसे भेजती है यह क्रेता नहीं तय कर सकता। यह रेलवे का आंतरिक मामला है। जबकि इस विक्रय पत्र पर वाराणसी के डिस्‍ट्रीक स्‍टेंप आफिसर  तथा अतिरिक्‍त कलेक्‍टर के भी हस्ताक्षर अंकित हैं।

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पिछले दिनों मोइनुद्दीन नामक किसी अज्ञात व्यक्ति के आवेदन पर उत्तर रेलवे के दो अधिकारियों ने कहा कि यह भूमि रेलवे की है और उन्होंने वाराणसी के उप जिलाधिकारी के यहां एक केस फाइल किया। इसका फैसला आने से पूर्व ही रेलवे ने सर्व सेवा संघ के भवनों पर इसे तोड़ने के नोटिस चिपका दिए जिसमें न तो किसी के हस्ताक्षर हैं और न ही मुहर।

पत्र में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि सर्व सेवा संघ के माध्‍यम से 75 वर्षों से देश के 72 रेलवे स्टेशनों पर सर्वोदय बुक स्टालों का संचालन किया जा रहा हैं। इसके लिए रेलवे ने संघ से इसी पते पर करारनामा किया है। यदि इसका स्वामित्व सर्व सेवा संघ का नहीं होता तो रेलवे संघ से करारनामा कैसे करता? वहीं परिसर के एक भवन में वर्षों से ‘सर्व सेवा संघ डाकघर’ स्‍थापित  है। भारतीय डाक विभाग ने यह स्थान सर्व सेवा संघ से लीज पर लिया है। यदि इसका स्वामित्व ‘अखिल भारत सर्व सेवा संघ’ का नहीं होता तो रेलवे संघ से करारनामा नहीं करता। 

प्रबंध ट्रस्‍टी महादेव विद्रोही ने कहा कि आवश्‍यक होगा तो संघ से संबंधित ट्रस्‍ट डीड संबंधित दस्तावेज प्रस्‍तुत भी किये जा सकेंगे। उन्‍होंने अपेक्षा की है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, संत आचार्य विनोबा भावे तथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे महापुरुषों की विरासत को बचाने में राष्‍ट्रंपतिजी निष्‍पक्ष रूप से पड़ताल करने हेतु आशाजनक पहल कर सकेगी।

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