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अरुंधति रॉय को 45वें यूरोपीय निबंध पुरस्कार दिये जाने की घोषणा, 12 सितंबर को स्विट्जरलैंड में मिलेगा पुरस्कार

अरुंधति रॉय को 45वें यूरोपीय निबंध पुरस्कार दिये जाने की घोषणा, 12 सितंबर को स्विट्जरलैंड में मिलेगा पुरस्कार

2021 में प्रकाशित ‘आज़ादी’ नामक निबंध संकलन के फ्रेंच अनुवाद के लिए मिला सम्मान नयी दिल्ली, 18 जून। जानी मानी लेखिका अरुंधति रॉय (Arundhati Roy) को वर्ष 2023 का 45वां ‘‘यूरोपियन एसे प्राइज फॉर लाइफटाइम अचीवमेंट’’ (European Essay Prize)  सम्मान...

2021 में प्रकाशित ‘आज़ादी’ नामक निबंध संकलन के फ्रेंच अनुवाद के लिए मिला सम्मान

नयी दिल्ली, 18 जून। जानी मानी लेखिका अरुंधति रॉय (Arundhati Roy) को वर्ष 2023 का 45वां ‘‘यूरोपियन एसे प्राइज फॉर लाइफटाइम अचीवमेंट’’ (European Essay Prize)  सम्मान दिया जाएगा। चार्ल्स वीलॉन फाउंडेशन (Charles Veillon Foundation)  ने इसकी घोषणा की।  यूरोपीय निबंध पुरस्कार स्विट्जरलैंड के लुसाने पैलेस में 12 सितंबर को दिया जाएगा।

रॉय को यह सम्मान 2021 में प्रकाशित ‘आज़ादी’ नामक निबंध संकलन के फ्रेंच अनुवाद के लिए दिया गया है। फाउंडेशन की ओर से यह पुरस्कार फ्रेंच, जर्मन और इटालियन के लेखकों को दिया गया है, जो अपने लेखन के माध्यम से विचारों के सतत विकास के प्रसार और उसके पोषण में योगदान करते हैं।

‘चार्ल्स वीलन फाउंडेशन’ पिछले चालीस वर्षों से भी ज्यादा समय से ‘यूरोपियन निबंध पुरस्कार’ से ऐसे लेखकों की किसी किताब, या किसी रचना को सम्मानित करता आ रहा है, जो अपने लेखन के माध्यम से विचारों के विकास के पोषण और प्रसार में योगदान दे रहे होते हैं। चार्ल्स वीलॉन फाउंडेशन का मानना है कि अरुंधति रॉय का यह निबंध फासीवाद का शानदार विश्लेषण और उसकी ख़िलाफ़त करती हैं।

चार्ल्स वीलॉन फाउंडेशन ने एक बयान में कहा, ‘‘… अरुंधती रॉय ने अपने लेखों में फासीवाद का विश्लेषण करते हुए बताया है कि इसे किस प्रकार अमली जामा पहनाया जा रहा है और वह अपने निबंधों का उपयोग मुकाबला के रूप में करती हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जो तेजी से हमारे जीवन से जुड़ रहा है। उनके निबंधों से कई लोगों को आश्रय मिलता है।’’

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इस पुरस्कार के लिए 20,000 स्विस फ्रैंक (₹18.33 लाख) की धनराशि नियत है। यह सम्मान 1975 में शुरु हुआ था। फाउंडेशन ने कहा कि वह ऐसे लेखकों की रचनाओं पर गौर करता है, जिनका काम मौजूदा समाज, उनकी प्रथाओं और विचारधाराओं का साक्षी है और उन पर मुखर टिप्पणी पेश करता है।

उल्‍लेखनीय है कि अरुंधति रॉय के पहले उपन्यास, ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ (मामूली चीजों का देवता), 1997 को ‘बुकर पुरस्कार’ मिला और यह उपन्यास दुनिया भर में एक साहित्यिक आकर्षण का केंद्र बना और इसकी काफी सराहना हुई। अपनी राजनीतिक और मानवीय प्रतिबद्धता के साथ-साथ, वे निरंतर एक समृद्ध साहित्यिक सृजनात्मक गतिविधि में लगी रहती हैं। उनके उपन्यास ‘द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैपिनेस’ (अपार खुशियों का घराना), के लिए उन्हें 2017 में ‘राजनीतिक पुस्तकों के लिए ब्रूनो क्रेस्की पुरस्कार’ मिल चुका है।2019 में उनका निबंध-संग्रह ‘माई सेडिशियस हार्ट’ (मेरा बाग़ी मन) प्रकाशित हुआ।

पूर्व में यह पुरस्कार एलेक्जेंडर ज़िनोविएव, एडगर मोरिन, त्ज़वेटन टोडोरोव, अमीन मालौफ, सिरी हस्टवेड्ट और एलेसेंड्रो बारिक्को जैसे लेखकों को दिया जा चुका है। इस पुरस्कार से सम्मानित बड़े स्विस विचारकों में जीन स्ट्रोबिंस्की, इसो कैमार्टिन, पीटर वॉन मैट, एलेन डी बॉटन या मोना चॉलेट भी शामिल हैं।

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