40वें निवानो शांति पुरस्कार की घोषणा पर गांधीवादी राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन

अहिंसा को दुनिया में विस्तार देने के लिए राजगोपाल को नागरिक अभिनंदन

भोपाल, 13 मार्च। वरिष्‍ठ गांधी विचारक एवं शांति दूत राजागोपाल पी. वी. को न्याय और शांति की सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था निवानो पीस फाउंडेशन, जापान द्वारा 40वें निवानो शांति पुरस्कार दिये जाने की घोषणा के उपलक्ष्य में आज गांधी भवन, भोपाल में उनका नागरिक अभिनंदन किया गया। इसके साथ ही सर्वधर्म सद्भावना मंच एवं समस्त समाज सेवी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में होली मिलन का आयोजन किया गया।

वरिष्ठ पत्रकार एवं सप्रेस के संपादक राकेश दीवान ने विख्यात गांधीवादी राजगोपाल पी.वी. का परिचय देते हुए कहा कि राजगोपालजी को लोग प्यार से ‘राजू भाई’ कहते हैं। इन्हें याद करते हुए कबीर की याद आती है। कबीर जैसा जीवन और कबीर गायन में वे रचे-बसे हैं। वे कथककली नृत्य में परांगत हैं, इसलिए वे अपनी भाव-भंगिमा से अपने विचारों को व्यक्त कर पाते हैं। उन्होंने चंबल में हिंसा के ताने-बाने को अहिंसा के माध्यम से खत्म किया। यह दुनिया का अतुलनीय काम है। उन्होंने गांधीवादी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया, जो देश-दुनिया में अहिंसा के माध्यम से शांति, समानता एवं न्याय के लिए काम कर रहे हैं।

गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. ने अपने अभिनंदन के प्रत्‍युतर में कहा कि अपने लोगों से मिला प्यार किसी भी पुरस्कार से बड़ा होता है। पुरस्कार का महत्व इस समय तीन कारणों से महत्‍वपूर्ण हो गया है। आज सरकार द्वारा हर सामाजिक आंदोलनों को दबाया जा रहा है, जबकि मानव अधिकार की बात संविधान में है। वहीं अलग-अलग तरह से संस्थाओं को परेशान किया जा रहा है, ऐसे समय में इस पुरस्कार का महत्व बढ़ जाता है। यह पुरस्कार महात्‍मा गांधी के काम को स्वीकारने के महत्व को भी स्‍थापित करता है, जबकि अपने देश में उन्हें नकारने की बातें हो रही हैं। वहीं यह पुरस्कार दुनिया में अहिंसा को महत्व देता है। आज देश में नफरत से बाहर आकर प्रेम एवं भाईचारे को बढ़ाने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि आजकल मैं चार स्तरीय तरीके से अहिंसा पर काम कर रहा हूं। मेरा पूरा जोर है कि सत्ता को कैसे अहिंसक बनाया जाए? 

इसके पूर्व वरिष्ठ पत्रकार लज्जा शंकर हरदेनिया ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी हिंसा के शिकार देश जापान है, वह अहिंसा के महत्व को समझता है। ऐसे देश से राजगोपाल को सम्मान मिलना देश के लिए गौरव की बात है। वरिष्‍ठ आईपीएस अधिकारी एवं गांधी विचार की हिमायती सुश्री अनुराधा शंकर ने कहा कि मंच का काम मील का पत्थर है। राजगोपालजी का काम सभी को जोड़ता है। राजाजी आज के जमाने के कबीर हैं। वे जिनसे मिलते हैं, उनको जोड़ते हैं। उन्होंने देश को जागृत किया है। समाज के अंतिम तबके के अधिकारों के लिए काम किया है। जापान का यह सम्मान पूर्वी दुनिया का नोबेल पुरस्‍कार है।

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सद्भावना मंच के संयोजक महेन्द्र शर्मा ने कहा कि राजगोपालजी ने गांधीवादी एवं सर्वोदयी विचारों को दुनिया में विस्तार दिया है। भंते सागर थेरा ने कहा किं सभी धर्म अपने-अपने सिद्धांत एवं मतों के अनुसार चलते हुए इंसानियत की बात कर रहे हैं। फादर आनंद मुटुंगल ने कहा कि देश को शांतिमय एवं भाईचारा वाला देश बनाने की जरूरत है। राजगोपालजी को जिस अहिंसक मूल्यों के लिए जापान से जो सम्मान मिला, उसे जीवन में अपनाने की जरूरत है। प्रो. मनोज जैन ने कहा कि राजगोपाल जी को सम्मान मिलने से देश गौरवान्वित हुआ है।

सर्वधर्म सद्भावना मंच के हाजी हारुन ने कहा कि देश सदियों से धर्मनिरपेक्ष रहा है। लेकिन इस वक्त देश में कुछ लोग आग लगाने की की कोशिश कर रहे हैं, तो हम पानी डालने का काम कर रहे हैं। गदर करने वाले चंद लोग होते हैं। हम प्यार मोहब्बत की बात करते हैं।

इस मौके पर एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रन सिंह परमार,  लेखक शैलेन्द्र शैली, जमीयत उलेमा के प्रदेश प्रमुख, संत पुजारी संघ के अध्यक्ष नरेंद्र दीक्षित, पूर्व विधायक महेश मिश्रा, सहित कई गणमान्य व्‍यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर सैकड़ों नागरिकजन उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन सतीश पुरोहित ने किया।

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