मालवा निमाड़ के खेतों में पैदा होने वाली सरसों के साथ बैंगन, सोयाबीन आदि जैसी फसलों और साग-भाजी के साथ फल आपकी थाली में परोसे जाएं और इनके शाकाहारी या मांसाहार होने का भेद नहीं कर पाए तो क्या होगा? ऐसे प्रकृति…
जीवन की तरफ पीठ देकर खड़ी की जा रही समृद्धि ने क्या हमें उस बुनियादी सुख से भी वंचित कर दिया है, जो इस तमाम खटराग का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए? और यदि यह सही है तो फिर क्या हमें…