ध्यान से देखें तो आज के दौर की समस्याओं, खासकर निजी समस्याओं को आपसी भरोसे के बल पर निपटाया जा सकता है, लेकिन विडंबना है कि इस मामूली बात को कोई समझना नहीं चाहता। कैसे इस भरोसे को पुनर्स्थापित किया…
आजादी के साढ़े सात दशकों बाद भी सीवर-सेप्टिक टेंक की सफाई में जान देते अनेक सफाईकर्मी हमारे विकास का ही मुंह नहीं चिढाते, बल्कि उस सामाजिक ताने-बाने को भी शर्मिंदा करते हैं जिसमें एक तबके को दूसरे की वीभत्स गंदगी…
सब जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा त्रासदी की वजह धरती पर बसे इंसानों की हवस पर आधारित जीवन-पद्धति है, लेकिन कोई इसे रोकना, बदलना नहीं चाहता। वैश्विक स्तर पर भी ठीक यही हालत है और तरह-तरह के जमावडों…