इंसानी वजूद के लिए रोटी, कपडा के बाद मकान तीसरा सर्वाधिक जरूरी संसाधन है, लेकिन हमारे देश में पहली और दूसरी जरूरतों की तरह इसका भी भारी टोटा है। समय-समय पर तत्कालीन सरकारें कुछ-न-कुछ करती तो हैं, लेकिन उससे सबके…
कहा जाता है कि हम एक ग्रह और सभ्यता की हैसियत से खुद को लगातार समाप्त करने में लगे हैं। यानि हम जानते-बूझते खुद को खत्म करने के सरंजाम जुटा रहे हैं। ऐसे में समूची कायनात को बचाने के लिए…