Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Year: 2022

खतरे में ‘सेवाग्राम’ की खादी

सरकारें अपनी हेठी में अब उस हद को भी पार करने लगी हैं जिसे महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन की बुनियाद बनाया था। हाल का मामला उस ‘सेवाग्राम आश्रम’ की खादी का है जहां बरसों-बरस खुद गांधी चरखा कातते…

अंधाधुंध फायरिंग लक्षण है अमेरिका की सांस्कृतिक रुग्णता का

मानसिक रोग और बंदूक के दुरुपयोग के संबंध को लेकर एक बार फिर से अमेरिका में बहस छिड़ी हुई है| बंदूकों का प्रेमी देश कहता है कि मानसिक बीमारी के कारण ऐसी घटनाएँ होती हैं, न कि सिर्फ बंदूक रखने…

मीडिया की आजादी : मीडिया की मुश्किलें

दुनियाभर के मीडिया पर नजर रखने वाले वैश्विक एनजीओ ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ की हाल में आई बीसवीं रिपोर्ट ने भारत में मीडिया के कामकाज को लेकर कई कठिन सवाल खडे कर दिए हैं। सरकार हमेशा की तरह इस रिपोर्ट को…

चिपको आंदोलन की 50 वीं वर्षगांठ : देश में वनों के संरक्षण के लिए फिर इसकी जरूरत

चिपको आंदोलन का इतना प्रभाव हुआ कि मई 1974 में राज्य सरकार ने डा. वीरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में एक समिति वनों के अध्ययन हेतु बनायी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में चिपको आंदोलन के कार्यो को सही बताया। संभवतः इसी…

शांति की लक्ष्मण-रेखा का विवेक जगाता गांधी-जनों का आह्वान

शांति सबसे बड़ा मानवीय धर्म है देश भर के वरिष्‍ठ  विशिष्ट गांधीजनों ने चिंता जाहिर की है कि देश में यहां-वहां से लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं जो बताती हैं कि भारतीय समाज के ताने-बाने को कमजोर करने की…

प्रथम पुण्‍य स्‍मरण : युगऋषि सुंदरलाल बहुगुणा

सुंदरलाल बहुगुणा का नाम भारत और विदेशों में वन संरक्षण और पर्यावरण संघर्ष की प्रेरणा का प्रतीक बन गया। पश्चिमी घाट क्षेत्र के वनों को बचाने के लिए शुरू किए गए अप्पिको आंदोलन के वे एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत थे।…

जंगल : उत्तराखंड में आग

बारामासी सडक से लगाकर बडे बांधों तक विकास के लगभग सभी आधुनिक कारनामों के अलावा उत्तराखंड के जंगलों में आग एक भीषण प्राकृतिक संकट है। इसकी चपेट में हर साल कई इलाकों के विशाल जंगल होम हो जाते हैं। पिछले…

रासायनिक, जैविक और प्राकृतिक खेती : क्या करे किसान?

‘हरित क्रान्ति’ के हल्ले में भरपूर रासायनिक खादों, दवाओं और कीटनाशकों की दम पर होने वाली फसलों को लेकर आजकल भारी बहस-मुबाहिसा छिडा है। एक तरफ, उपभोक्ता इन फसलों के प्रति बेजार होता जा रहा है और दूसरी तरफ, किसान…

अमन के नाम से नफ़रत बेचने का मीडिया व्यापार !

अख़बारों के पाठकों और राष्ट्रीय (राष्ट्रवादी?) चैनलों की खबरों के प्रति ईमानदारी और विश्वसनीयता के प्रति पाठकों और दर्शकों का भ्रम काफ़ी हद तक टूटकर संदेहों में तब्दील हो चुका है।उनका बचा हुआ भरोसा भी सरकारी इंजीनियरों द्वारा बनवाए जाने…

तपती दुनिया में घनी छांह है बुद्ध की देशना

बुद्ध के जीवन का आखिरी वाक्य उनके असाधारण रूप से प्रज्ञाशील होने को पूरी तरह स्थापित कर देता है। आज के समय में जब हर धर्म का अनुयायी सत्य को अपनी जेब में रखने का, उसके अकाट्य होने का दावा…