Month: April 2021

कोराना-काल में अन्य बीमारियां

पिछले साल-सवा साल से कोविड-19 संक्रमण दुनियाभर को हलाकान किए है, लेकिन क्या इसके चलते दूसरी बीमारियों की तरफ से मुंह फेरा जा सकता है? क्या आमतौर पर होने वाली बीमारियां, कोविड-19 की अफरातफरी में इलाज न मिलने के कारण…

बिहारी लाल : मौन सेवक व कर्मयोगी की तरह निभाते रहे भूमिका

स्‍मृति शेष : श्रध्‍दांजलि महात्मा गांधी, विनोबा भावे एवं जयप्रकाश नारायण के विचारों को आत्मसात करने वाले समाजसेवी एवं सर्वोदयी नेता बिहारी लाल नागवाण ने गांधीवादी परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ समाज में व्याप्त कुरूतियों को उखाड़ फेंकने के…

डॉ. भीमराव अंबेडकर- बहुजनों के मसीहा

14 अप्रैल – डॉ. भीमराव अंबेडकर की130वीं जयंती पर विशेष स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, बौद्ध धर्म, विज्ञानवाद, मानवतावाद, सत्य, अहिंसा आदि के विषय अम्बेडकरवाद के सिद्धान्त हैं। दलितों में सामाजिक सुधार, भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार एवं प्रचार, भारतीय संविधान…

कितने बँटवारे और कितने पाकिस्तान बाक़ी हैं अभी ?

बंगाल चुनाव : त्‍वरित टिप्‍पणी चुनाव-परिणामों से उपजने वाली चिंता हक़ीक़त में तो यह होनी चाहिए कि क्या ममता के हार जाने की स्थिति में पहले नंदीग्राम और फिर बंगाल के दूसरे इलाक़ों में मिनी पाकिस्तान चिन्हित किए जाने लगेंगे?…

कुओं से बुझेगी बुंदेलखंड की प्यास

सालाना कर्मकांड की तरह अब फिर पानी पर बिसूरने का मौसम आ गया है। हर साल महाराष्ट्र के विदर्भ की तरह मध्‍यप्रदेश-उत्तरप्रदेश का बुंदेलखंड इस दुख में अगुआ रहता है, लेकिन अधिकांश सरकारी, गैर-सरकारी कोशिशें, एक जमाने में उम्दा खेती…

भोजन में बढ़ता रासायनिक जहर

तेजी से फैलती कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों ने हमारी भोजन उत्पादन की पद्धति पर तीखे सवाल खडे कर दिए हैं। हम जिसे भोजन मानकर खा रहे हैं क्या वह सचमुच जहर-मुक्त, पौष्टिक और इंसानी शरीर के लिए सर्वथा उपयुक्त है?…

वैज्ञानिक प्रयोगों और सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाते थे कालूराम शर्मा

इंदौर (सप्रेस) । प्रख्यात प्रकृति शोधक, विज्ञान लेखक व वनस्पति शास्त्री और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय कालूराम शर्मा का 10 अप्रैल की दोपहर को निधन हो गया। वे 59 वर्ष के थे। उन्‍होंने पिछले दिनों ही कोरोना वैक्‍सीन लगवाई…

श्रम की प्रतिष्ठा के लिए काम के बदले अनाज

ग्रामीण बेरोजगारी के संकट के इस दौर में देश के ख्‍यात सामाजिक संगठन ‘एकता परिषद’ ने एक अभिनव प्रयोग किया है। काम के बदले अनाज की पारम्परिक पद्धति में श्रम की प्रतिष्ठा जोडकर ‘एकता परिषद’ ने ग्रामीणों को अपने इलाके…

बुजुर्गों की बदहाली

इन दिनों हम एक देश की हैसियत से खुद के युवा होने का बडा जश्न मनाते रहते हैं, लेकिन क्या हमने कभी यह भी सोचा है कि पचास साल बाद यही आबादी बूढी भी होगी और तब देश की इसी…

अरविंद ओझा : मरुस्थल की धरती में उम्मीद के बीज बोए

अरविंद ओझा का जीवन सरल, सहज व सादगीपूर्ण था। वे जमीनी सामाजिक कार्यकर्ता तो थे ही पर उनकी पठन-पाठन में गहरी रूचि थी। उन्हें यहां गुरूजी के नाम से जाना जाता था। वे कहानीकार व कवि भी थे। वे बहुत…