Month: January 2021

जीवन का प्रतीक है – आंदोलन

किसी भी समाज में होने वाले आंदोलन उस समाज की जीवन्तता का प्रतीक होते हैं और इस लिहाज से देखें तो दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन, अपने तमाम सवालों के अलावा कृषि-क्षेत्र की जिन्दादिली का प्रतीक भी है।…

नए दशक की दहलीज पर खड़ा गणदेवता

‘गणतंत्र दिवस’ की 26 जनवरी 71 साल पहले हमें अपने संविधान को अंगीकार करने की याद तो दिलाती ही है, साथ ही एक नागरिक की हैसियत से हमें अपने कर्तव्‍यों का बोध भी कराती है। इक्‍कीसवीं सदी के तीसरे दशक…

कौन सीखना चाहता है, महामारियों से?

कोरोना वायरस ने और कुछ किया हो, ना किया हो, उसने हमें पर्यावरण के लगातार बदहाल होते जाने की चेतावनी जरूर दे दी है। क्या इस चेतावनी से हमारी दुनिया कुछ सीख पाएगी? मौजूदा हालातों से तो ऐसा कतई नहीं…

शहरी मध्‍यवर्ग की बेतुकी मान्यताएं

किसान आंदोलन पर भी शिद्दत और नासमझी से सवाल उठाया गया है कि लाखों लोगों के भोजन (लंगर) और दूसरी व्यवस्थाओं का इंतजाम आखिर कैसे और कौन कर रहा है? कुछ अधिक ‘कल्पनाशील’ शहरी इसमें कनाडा, इंग्लेंड, अमरीका और वहां…

ख़ौफ़ के साए में एक लम्बी अमेरिकी प्रतीक्षा का अंत!

बीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस को वाशिंगटन में केवल सत्ता का शांतिपूर्ण तरीक़े से हस्तांतरण हुआ है, नागरिक-अशांति की आशंकाएँ न सिर्फ़ निरस्त नहीं हुईं हैं और पुख़्ता हो गईं हैं। देश की जनता का एक बड़ा प्रतिशत अभी भी…

पत्रकार, पत्रकारिता और किसान आंदोलन

राजदीप अम्बानी-अदाणी को हो रहे नुक़सान की चर्चा करते हुए इस बात का ज़िक्र नहीं कर पाए कि किसी भी आंदोलन का इतना लम्बा चलना क्या यह संकेत नहीं देता कि सरकार के वास्तविक इरादों के प्रति किसानों का संदेह…

ग़ज़ल सुनते हों तो मधुरानी को सुनें

मधुरानी की गायकी के मुरीद लोगों की सूची बहुत लंबी है। इंदिरा गांधी और डॉ जाकिर हुसैन इन्हें खूब सुनते थे। उनके एलबम ‘इंतज़ार’ में दिलीप कुमार ने अपनी आवाज दी है। मुम्बई में जब इसकी रिकॉर्डिंग चल रही थी,…

न्याय होना बनाम न्याय होते हुए दिखना

न्यायाधीश को सिर्फ निष्पक्ष और स्वतंत्र होना ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखना भी चाहिए। इसी के बाद वह शब्द हमें ज्यादा सुनाई देने लगा, जिसे अंग्रेजी में Recuse कहते हैं। जब न्यायाधीश या कमेटी का कोई सदस्य अपने स्वविवेक से…

किसान आंदोलन : एक बार फिर बकासुर

वैसे देखा जाए तो बकासुर की यह कथा विज्ञान और तकनीक पर न्यौछावर विद्वानों से लेकर अहर्निश भक्तिभाव में डूबे धर्म-प्राणों तक सभी में कमोबेश मौजूद रहती है। सभी को लगता है कि संकट या समस्या का एकमात्र इलाज केवल…

आफत में सरकार , किसान संघ का आसरा

किसान संघ की बेंगलुरू की चिंतन बैठक में दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन को लेकर चिंता व विचार मंथन होना ही था। बैठक का मुख्य मुद्दा भी यही था। क्योंकि अपने अनुषांगिक संघठन भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार…