Month: December 2020

समाचार

समाज का अभिक्रम जगाने से ही सरकारों पर लगाम कसेगी – सर्वोदय विचारक अमरनाथ भाई

उमरिया । आज हमने सरकार को ही सब कुछ मान लिया है । सब कुछ सरकार के रहमों – करम पर छोड़ दिया है इसीलिए देश चौतरफा समस्याओं की गिरफ्त में है। अर्थव्‍यवस्‍था रसातल में जा रही है और अन्नदाता…

आने वाली परिषद नकारात्मक सोच के बजाय सकारात्मक सोच के साथ अपनी शुरुआत करें।

इंदौर नगर निगम चुनाव – 2021 को लेकर कैसी हो परिषद हमारी? विषय पर परिचर्चा में बोले वक्ता संस्था सेवा सुरभि और इंदौर प्रेस क्लब का संयुक्‍त आयोजन इंदौर। 27 दिसंबर।  इंदौर शहर हमेशा से एक अच्छा उदाहरण प्रस्‍तुत करते…

‘मैं नेहरू का साया था’

पुस्‍तक समीक्षा भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को लेकर तरह-तरह के मनगढंत किस्‍से-कहानियां प्रचलित हैं और इतिहास को पीठ दिखाने की राजनीति के इस दौर में ये कहानियां और भी चटखारे लेकर सुनी-कही जा रही हैं। ऐसे में…

खेती को मुख्‍यधारा में लाता आंदोलन

दिल्‍ली की चौहद्दी पर पिछले करीब 21-22 दिनों से जारी किसान आंदोलन ने खेती-किसानी को कम-से-कम बहस के लायक तो बना ही दिया है। इस लिहाज से देखें तो पिछले तीन-साढे तीन सप्‍ताह देशभर के लिए कृषि-प्रशिक्षण का बेहतरीन मौका…

विकास की ‘बकासुरी’ नीतियों से निपटता किसान

पिछले बडे आंदोलनों को देखें तो दिल्‍ली का मौजूदा आंदोलन कई मायनों में भिन्‍न दिखाई देगा। तरह-तरह से उकसावे के बावजूद अपने अहिंसक स्‍वरूप, जाति-धर्म-वर्ग के हमारे अंतर्निहित विभाजन से परे, सामूहिक नेतृत्‍व और युवाओं-बुजुर्गों, महिलाओं-पुरुषों आदि को यथायोग्‍य जिम्‍मेदारी…

‘अभया’ और ‘निर्भया’ के अर्थ भी समान हैं और व्यथाएँ भी !

डेढ़ करोड़ की आबादी वाले कैथोलिक समाज में पादरियों और ननों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक है। कोई पचास हज़ार पादरी हैं और बाक़ी नन्स हैं। ऊपरी तौर पर साफ़-सुथरे और महान दिखने वाले चर्च के साम्राज्य में कई…

नागरिकों को ही ‘विपक्ष’ का विपक्षी बनाया जा रहा है !

सरकार ने अब अपने किसान संगठन भी खड़े कर लिए हैं। मतलब कुछ किसान अब दूसरे किसानों से अलग होंगे ! जैसे कि इस समय देश में अलग-अलग नागरिक तैयार किए जा रहे हैं। धर्म को परास्त करने के लिए…

अनुपम मिश्र : पहली मुलाकात और चिपको आंदोलन

सतत विश्वसनीयता खोते मीडिया के इस जमाने में यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि वन-संरक्षण के ‘चिपको आंदोलन’ को उन दिनों की ख्यात साप्ताहिक पत्रिका ‘दिनमान’ और उसके अनुपम मिश्र जैसे लेखक क्या और कैसी ऊर्जा देते थे। प्रस्तुत…

किसान आंदोलन : जानने-सीखने लायक कुछ बातें!

देश की राजधानी की सीमाओं पर बैठे किसानों में यह विभाजन दिखाई नहीं पड़ता, लेकिन आखिर यह एक ‘आपातकाल’ भर है। बिना किसी बहस-मुबाहिसे के पहले अध्‍यादेश जारी करके और फिर संसद के दोनों सदनों में पारित करवाकर लाए गए…

शिप्रा से गंगा तक पवित्र जल आचमन योग्य भी नहीं

कहा जा रहा है कि गंगा के पानी में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। सवाल यह है कि अरबों रुपये खर्च होने के बाद भी गंगा का पानी पीने लायक क्यों नहीं है ? चाहे उत्तर प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री को…