एक तरह से देखें तो गांधी का समूचा जीवन मतभेदों से निपटते ही बीता, भले ही वे मतभेद संगी-साथियों, परिवार और धुर विरोधी विचारों के हों या फिर अपने हित साधने में लगी देशी-विदेशी सत्ताओं के। इन मतभेदों से निपटने…
पत्रकार अरविन्द मोहन के मुताबिक अभी कुछ महीनों पहले तक जिन महिलाओं को अज्ञात कुल-शील की ‘नॉन-एन्टिटी’ माना जाता था, ‘शाहीन बाग’ ने उन्हें हमारे लोकतंत्र की सर्वाधिक समझदार, संघर्षशील, मुखर संवैधानिक इकाई में तब्दील कर दिया है। किसी भी…