साठ के दशक में लाई गई ‘हरित-क्रांति’ ने बेहद सीमित, खासकर गेहूं-चावल की, फसलों को बेतरह बढ़ावा दिया था, लेकिन इसने कई पौष्टिक, कम लागत की आसान फसलों को दरकिनार कर दिया था। क्या आज के दौर में फिर से…
रासायनिक खादों-दवाओं-कीटनाशकों की भरपूर मात्रा से विपुल पैदावार करने वाली ‘हरित क्रांति’ ने अब अपने पैदा किए खतरों को उजागर करना शुरु कर दिया है। एक जमाने में कभी-कभार होने वाली कैंसर जैसी बीमारी अब घर-घर का संकट बन गई…