सवाल सिर्फ़ तत्कालीन हुकूमतों का ही नहीं है ! नागरिकों की एक बड़ी आबादी भी कुछ तो व्यवस्था-जनित कारणों और कुछ निजी तनावों के चलते गहरे अवसाद और मानसिक बीमारियों की शिकार होती जा रही है। समाज में अपराध और…