30 जनवरी 1948 की संध्या, बिड़ला भवन में प्रार्थना के लिए बढ़ते महात्मा गांधी “हे राम” के अंतिम शब्दों के साथ साकार से निराकार में विलीन हो गए। उनका महाप्रयाण केवल एक देह का अंत नहीं था, बल्कि सत्य, अहिंसा…
आज से 76 साल पहले महात्मा गांधी हम सबसे सदा के लिए विदा हुए थे। उनके जाने के बाद का समय हमारे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास का समय रहा है, लेकिन इस दौर में गांधी एक प्रस्थान–बिन्दु की तरह…