Rajiv Tyagi

एक प्रवक्ता की मौत और मीडिया की कथित मजबूरियाँ !

बेबाक टिप्‍पणी एक प्रवक्ता की मौत से उपजी बहस का उम्मीद भरा सिरा यह भी है कि चैनलों की बहसों में जिस तरह की उत्तेजना पैदा हो रही है वैसा अख़बारों के एक संवेदनशील और साहसी वर्ग में (जब तक…