अखबारों में भले ही ‘तीन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था’ बताकर हमारे देश को आर्थिक रूप से श्रेष्ठ देशों की पंक्ति में शामिल बताया जाता हो, लेकिन मैदानी हालात खस्ता हैं। इसकी बानगी के लिए इतना जानना ही काफी है कि देश…
धरती का जीवन बचाने की खातिर वैश्विक जमावडे ‘कॉप 28’ की विफलताओं के सामने अब महात्मा गांधी खडे किए जा रहे हैं और कमाल यह है कि यह पहल मौजूदा संकटों को पैदा करने वाले पश्चिमी समाज की तरफ से…