हम हर दीपावली पर राम की प्रतीक्षा करते हैं, पर अपनी अयोध्या में लौटने का साहस नहीं जुटा पाते। असली दीपावली तब होगी जब हम अपने भीतर के वनवास से लौटें, भय से नहीं, विश्वास से दीया जलाएँ — ताकि…