ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य में सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों की अनुपस्थिति को लेकर बहस छिड़ी है। यह बहस साहित्यकार की सामाजिक जिम्मेदारी और उसकी व्यक्तिगत रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन का सवाल उठाती है। सवाल है क्या हर…