‘सुंदर वन’ के पेड़-पौधों में चिर स्‍थाई रहेंगे पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा

पर्यावरण संरक्षण को लेकर लंबे समय से कार्य कर रहे पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणाजी के जन्मदिन पर उनके नाम से पांच हेक्टेयर क्षेत्र में ‘सुंदर वन’ की स्थापना की थीं, जो अब घने जंगल में तब्दील हो चुका है। वे बताते है कि वर्ष 2010 में मुझे और मेरे साथि यों को सुंदरलाल बहुगुणा जी व बहन विमला जी की सेवा करने का मौका था और हमने सुंदर वन की स्थापना की थी ।

देहरादून के शुक्लापुर स्थित हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन (हेस्को) के मुख्यालय में बहुगुणाजी की स्‍मृति को स्‍थाई बनाने की दृष्टि से 26 मई को उनकी अस्थियों को सुंदर वन में विसर्जित किया गया। ऐसे में इस वन का महत्व और भी बढ़ गया है। इससे ‘सुंदर वन’ के पेड़-पौधों में वे हमेशा जीवित रहेंगे। यह वन पर्यावरणविद् बहुगुणा की प्रकृति और पर्यावरण की सोच को समर्पित है।

पद्मभूषण डॉ. जोशी बताते हैं कि वर्ष 2009 से 2011 तक बहुगुणा हेस्को मुख्यालय में रहे। वर्ष 2010 में बहुगुणा के जन्म दिन पर प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण पर मंथन हुआ। इसी दौरान हेस्को से लगे पांच हेक्टेयर क्षेत्र को ऐसे जंगल के रूप में विकसित करने की ठानी गई, जो वन्यजीवों के लिए फूड पार्क हो। वन विभाग और मित्र संगठनों के सहयोग से इसे विकसित करने के साथ ही बहुगुणा के नाम पर इसका नामकरण करने का निश्चय किया गया। वह बताते हैं कि तब यहां पहला पौधा भी पर्यावरणविद् बहुगुणा ने ही रोपा था।

डॉ. जोशी ने बताते है कि ‘सुंदर वन’ को बहुगुणा के संदेशों के प्रचार-प्रसार का माध्यम बनाया जाएगा। इस वन में सुंदरलाल बहुगुणाजी की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी, ताकि प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े लोग उन्हें याद कर सकें।

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जोशी कहते है कि मेरा सौभाग्य रहा है कि मुझे उनके साथ चार साल रहने का अवसर प्राप्त हुआ था। मैंने उनके जैसा सादगी पसंद और प्रकृति-पर्यावरण के लिए इतना चिंतित व्यक्ति किसी और को नहीं देखा। वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनके काम हमारे बीच हैं। उनके कार्यों का संकलन करके, उनके सुझाए मार्गों पर चलकर और प्रकृति व पर्यावरण के प्रति जागरूक भाव रखकर ही हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।

उल्‍लेखनीय है कि अनिल जोशी देश के जाने माने पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्‍होंने हिमालयन पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संस्थान (हैस्को) स्थापना की है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ। उन्हें जमनालाल बजाज पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया गया है। इसके अलावा उन्हें अशोका फेलोशिप, द वीक मैन ऑफ द एयर और आईएससी जवाहर लाल नेहरू अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। 

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