1 से 10 मई 2025 को सामाजिक न्याय और परिवर्तन की दिशा में युवाओं के लिए बुनियाद कार्यशाला का आयोजन  

बुनियाद कार्यशाला के लिए युवा कार्यकर्ताओं और छात्रों से आवेदन आमंत्रित

पालमपुर, 25 मार्च 2025  सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं को समझने और उनसे निपटने के लिए युवाओं को तैयार करने हेतु ‘बुनियाद’ नामक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 1 से 10 मई 2025 तक हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित संभावना संस्‍थान में आयोजित होगी।

‘बुनियाद’ का लक्ष्य युवाओं को सामाजिक न्याय और बदलाव की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रशिक्षित करना है। यह कार्यशाला जातिगत भेदभाव, सांप्रदायिकता, पितृसत्ता और पूंजीवाद जैसी सामाजिक समस्याओं के गहन अध्ययन पर केंद्रित होगी।

कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच संवाद होगा, जिसमें भारत में ‘विकास’ की वास्तविक परिभाषा और इसका प्रभाव, जाति, सांप्रदायिकता, राष्ट्रवाद और पितृसत्ता की ऐतिहासिक और समकालीन भूमिका, पूंजीवाद, नव-उदारवाद और आर्थिक असमानता, सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति का विश्लेषण और समाधान, जन आंदोलनों की भूमिका और सामाजिक परिवर्तन की राह पर जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

कार्यशाला में भाग लेने वालों को सीखने और समझने का एक नया अनुभव प्रदान किया जाएगा। इसमें संवाद और बहस, सामूहिक गतिविधियाँ, थिएटर और फिल्मों के माध्यम से संवाद, क्षेत्रीय यात्राएँ शामिल होंगी। कार्यशाला का संचालन और स्त्रोत व्यक्ति के रूप में हिमांशु कुमार शामिल होंगे।

कौन कर सकता है आवेदन?

कार्यशाला में 25 से 38 वर्ष के वे युवा कार्यकर्ता और छात्र भाग ले सकते हैं, जो किसी सामाजिक संगठन, संस्था या जन-आंदोलन से जुड़े रहे हों या वॉलंटियर के रूप में कार्य कर चुके हों। यह कार्यशाला किसी सरकारी या कॉर्पोरेट संस्था द्वारा प्रायोजित नहीं है, इसलिए प्रतिभागियों से रहने-खाने की व्यवस्था के लिए 5000 रुपये का अंशदान अपेक्षित है। आर्थिक सहायता की आवश्यकता होने पर आवेदन में इसका उल्लेख किया जा सकता है। कार्यशालाहिंदी भाषा में होगी। आवेदक निम्‍नांकित लिंक पर क्लिक कर आवेदन कर सकते है।

See also  बाबा साहेब को आज समझने की जरूरत है

Table of Contents

सागर से अंतरिक्ष तक : रक्षा विमर्श को नई दिशा देती शोधपरक कृति

भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा रक्षा विमर्श केवल सैन्य शक्ति का वर्णन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामरिक चेतना का दर्पण होता है। ऐसे समय में वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल की पुस्तक ‘सागर से अंतरिक्ष तक:

Read More »

अपने जैसा ‘एआई’

‘आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस’ उर्फ ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ के कसीदे बांचते हुए हम अक्सर इस मामूली सी बात को भूल जाते हैं कि ‘एआई’ आखिरकार एक व्यक्ति और समाज की तरह हमारा ही प्रतिरूप है। यानि हम उस मशीन में जैसा और जितना

Read More »

मध्यप्रदेश का बजट : ग्रीन फ्रेमवर्क का दावा, जलवायु संकट की अनदेखी

हाल के मध्यप्रदेश के बजट में तरह-तरह की लोक-लुभावन घोषणाओं के बावजूद पर्यावरण-प्रदूषण से निपटने की कोई तजबीज जाहिर नहीं हुई है। यहां तक कि पर्यावरण के लिए आवंटित राशि भी पिछले साल के मुकाबले घटा दी गई है। आखिर

Read More »