जाने माने गांधी विचारक एवं विसर्जन आश्रम, इंदौर से जुडे किशोर गुप्ता का निधन

27 नवंबर । जाने माने गांधी विचारक एवं विसर्जन आश्रम, इंदौर के ट्रस्‍टी, योगाचार्य श्री किशोर गुप्ता का आज सुबह हृदयगति रूकने से निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। आज सुबह उन्‍हें बैचेनी महसूस होने पर नजदीक के प्रायवेट हास्पिटल में ले जाया गया, लेकिन उन्‍हें बचाया नहीं जा सका। सादगीभरा जीवन, प्रभावी व्यक्तित्व वाले किशोर गुप्ता समाज को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आजीवन सामाजिक कार्यों में जुटे रहे। उनका अंतिम संस्‍कार शाम 4 बजे इंदौर के रीजनल पार्क मुक्तिधाम में किया जाएगा। उनके परिवार में पत्‍नी और 3 बेटे है।

वे आश्रम के अलावा जिला सर्वोदय मंडल, सर्वोदय शिक्षण समिति, माचला सहित अनेक सामाजिक व रचनात्‍मक संस्‍थाओं से भी जुडे रहे। उन्‍होंने आचार्य विनोबा भावे की प्रेरणा से भूदान आंदोलन में हिस्‍सा लिया और वे 1974 में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में शामिल होने बिहार चले गए। अपने बिहार प्रवास के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1975 में अपनी हस्तलिखित पत्रिका ‘लोक संदेश’ निकाली जिसके चलते उन्हें मीसा के दौरान बंदी बना लिया गया। वे 19 माह जेल में रहे। 1979 से 1982 तक मध्य प्रदेश सर्वोदय मंडल में मंत्री रहे। इसके बाद 1982 से 1998 तक इंदौर के नवलखा स्थित विसर्जन आश्रम में मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी।

Kishore Gupta

वे मूलतः आगरा के थे लेकिन रेलवे की नौकरी मध्यप्रदेश के इटारसी ले आई। दिल-दिमाग में गांधी और विनोबा ऐसे बसे कि नौकरी और घर दोनों छोड़ना पड़े। अब विसर्जन आश्रम और जीवनशाला ही उनका जीवन की राह बन गई थे। उन्‍होंने विनोबाजी से मिलकर उनके साथ काम करने की इच्छा जताई तो 1966 में उन्होंने विसर्जन आश्रम के तत्कालीन संचालक दादाभाई नाईक के पास भेजा। तब से यहीं काम कर रहे थे। 1978 में विजर्सन ऑश्रम की मदद से जीवनशाला की स्थापना की। जीवनशाला में गरीब बस्तियों के बच्चों को पढ़ाया जाता है। यहां की शिक्षा अनुशासन, बौध्दिक विकास, सामाजिकता और कौशल के चार बिंदुओं को ध्यान में रखकर दी जाती है।

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24 मार्च 1946 को जन्में किशोर गुप्ता बचपन से ही महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित थे। जब वे 16 साल के थे तब ही उन्होंने देश एवं समाज सेवा का संकल्प लिया। 18 साल की उम्र में वे मध्य रेलवे की सेवा में लगे। 20 साल की उम्र में गांधी विचार के कार्यों से जुडकर कार्य करना आंरभ किया। वे पिछले पांच दशक से समाज के वंचित तबके लिए कार्य कर रहे थे। गांधीजी की आदर्श यही थे कि हम खुद के लिए तो कार्य करते हैं, लेकिन अगर कुछ समय निकालकर दूसरों की मदद करें तो समाज का विकास हो सकेगा। इसी आदर्श और सिद्धांत पर किशोर गुप्ता कार्य करते रहे।

1966 में श्री किशोर गुप्ता मध्य प्रदेश के इंदौर में विसर्जन आश्रम में आकर बस गए और वहां श्रमदान, योगाचार्य के रूप में अपने नए सफर की शुरुआत की। किशोर भाई  ने 1968-69 में निमाड़ के सैकड़ों गांवों में पैदल घूमकर की ग्रामदान यात्राएं की। तवों पर लिखते हुए झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को अनूठे ढंग से पढ़ाने के काम में संलग्‍न रहे।1974 में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में शामिल होने बिहार चले गए। अपने बिहार प्रवास के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1975 में अपनी हस्तलिखित पत्रिका ‘लोक संदेश’ निकाली जिसके चलते उन्हें मीसा के दौरान बंदी बना लिया गया। वे 19 माह जेल में रहे।

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