गांधी स्मारक निधि के राष्ट्रीय युवा शिविर में युवाओं ने लिया शांति, प्रेम और सेवा का संकल्प

कौसानी में संपन्न हुआ राष्ट्रीय गांधी विचार युवा शिविर

कौसानी, 16 अक्‍टूबर। केंद्रीय गांधी स्मारक निधि  द्वारा 12 से 15 अक्टूबर तक उत्तराखंड के अनासक्ति आश्रम, कौसानी में आयोजित राष्ट्रीय गांधी विचार युवा एवं विश्वविद्यालय शिविर सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 130 युवाओं ने हिमालय की गोद में स्थित इस पवित्र आश्रम में गांधी विचार का सघन प्रशिक्षण प्राप्त किया।

शिबिर के अंतिम दिवस पर शिविरार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस शांत, गंभीर और प्रेरणादायक वातावरण में हमें गांधी विचार को गहराई से समझने और आत्मसात करने का अवसर मिला। हमने अनुभव किया कि सार्थक जीवन के लिए विचार को आचरण में उतारना ही वास्तविक साधना है। पहले हम समाज में गांधी विचार को लेकर अनेक भ्रम और गलतफहमियां देखते थे, किंतु यहां आकर संवाद, चिंतन, भ्रमण, रचनात्मक गतिविधियों और आपसी संपर्क के माध्यम से समझ आया कि यह विचार किसी संकीर्ण दृष्टि का नहीं, बल्कि अत्यंत व्यापक, जीवंत और मानवीय मूल्य आधारित है — जो नैतिकता, चरित्र और सहअस्तित्व की भावना को सर्वोपरि मानता है।

शिविरार्थियों ने यह भी संकल्प लिया कि शिविर से लौटकर वे अपने-अपने समाज में प्रेम, शांति और सद्भावना फैलाने का कार्य करेंगे, तथा हिंसा और घृणा के वातावरण को समाप्त करने में अपनी भूमिका निभाएँगे।

शिविर संयोजक एवं केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के मंत्री श्री संजय सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी का यह नैतिक दायित्व है कि शिविर से लौटने के बाद हम अपने शहरों और जिलों में गांधी विचार से जुड़े लोगों और संस्थानों से मिलें, अंतिम व्यक्ति की आवाज़ को बुलंद करें और रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सार्थक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। हमें हफ्ते या महीने में कुछ समय समाज सेवा और रचनात्मक कार्यों के लिए अवश्य निकालना चाहिए।

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गांधी विचारक प्रो. डी. एम. दिवाकर ने विद्यार्थियों को आशीर्वचन देते हुए कहा कि स्वाध्याय, संगति, सत्संग और संघर्ष — ये चार सूत्र हमारे जीवन के पथ-प्रदर्शक होने चाहिए। इन्हें अपनाने से ही हम विचार को जीवन में उतार सकते हैं।

हरिजन सेवक संघ (उत्तर प्रदेश) की सचिव कुसुम बहन ने युवाओं की सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा आज के युवाओं के बीच गांधी विचार पर संवाद होते देख अत्यंत आनंद हो रहा है। ऐसे शिविर समाज में आशा और संवेदना का संचार करते हैं।

केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष श्री रामचंद्र राही ने कहा हिमालय की पावन गोद में जब आपने गांधी विचार का प्रशिक्षण प्राप्त किया है, तो विश्वास है कि आपको हिमालय जैसी ऊँचाई और सागर जैसी गंभीरता प्राप्त होगी। आप सभी भविष्य में समाज के जिम्मेदार नागरिक बनकर देश की दिशा तय करेंगे।

उत्तर प्रदेश गांधी स्मारक निधि के मंत्री श्री लाल बहादुर राय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस वर्ष का गांधी विचार युवा शिविर कई दृष्टियों से विशेष रहा। आयोजन स्थल स्वयं में ऐतिहासिक और प्रेरणादायक रहा — कौसानी स्थित अनासक्ति आश्रम, जहाँ महात्मा गांधी ने ‘अनासक्ति योग’ की रचना की थी। शिविर की विशेषता यह रही कि इसमें पारंपरिक व्याख्यान शैली के स्थान पर संवाद, समूह चर्चा, श्रमदान, प्रार्थना, स्वाध्याय, भ्रमण और रचनात्मक गतिविधियों पर अधिक बल दिया गया।

शिविर के दौरान तीन बौद्धिक सत्र आयोजित हुए, जबकि अधिकांश समय प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष अनुभवात्मक शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, नदी संवाद, सफाई अभियान और स्थानीय समुदायों के साथ संपर्क कर गांधी के ग्राम स्वराज और सतत जीवनशैली के भाव को जिया।

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शिविर के समापन सत्र में विद्यार्थियों ने राज्यवार समूह बनाकर इस बात पर चर्चा की कि गांधी विचार को अपने-अपने क्षेत्रों में कैसे ले जाया जाए ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक यह संदेश पहुँच सके। दिल्ली और मध्य प्रदेश के साथियों ने श्री संजय सिंह जी के साथ संवाद के दौरान यह तय किया कि वे अपने जिलों में युवाओं को जोड़कर गांधी विचार पर आधारित युवा संगठन का निर्माण करेंगे। इसी क्रम में मध्य प्रदेश में आगामी नवंबर माह में दो दिवसीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर एवं संगठन निर्माण संवाद आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया।

यह शिविर न केवल गांधी विचार के अध्ययन का मंच बना बल्कि युवाओं के लिए आत्मचिंतन, सहअस्तित्व और सेवा के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा भी बना।

शिविर के आयोजन में एड कृष्ण पाल सिंह विष्ट, विकास मिश्रा, आबिदा बेगम, के यादव राजू, दीपक पांडे, नीरज यादव, बसंत भारद्वाज, अंकित मिश्रा, अनासक्ति आश्रम के व्यवस्थापक राजेंद्र पांडेय, लक्ष्मी आश्रम कौसानी, अरुण भाई आदि का सहयोग सराहनीय रहा।

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