निशुल्क दवा योजना में वितरित दवा की गुणवत्ता की जांच हेतु कार्रवाई की मांग
जयपुर, 14 अक्टूबर। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया, राजस्थान राज्य इकाई ने राजस्थान राज्य में प्रतिवर्ष लगभग ₹600 करोड़ मूल्य की दवाएं या तो अमानक अथवा नकली पाई जाने को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मुख्य सचिव राजस्थान एवं केंद्रीय सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय, नई दिल्ली को पत्र लिखकर प्रदेशवासियों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरे पर आवश्यक कार्यवाही के लिए आग्रह किया है।
अभियान के अनिल गोस्वामी, बसंत हरियाणा, कैलाश मीणा, हेमलता कंसोटिया, सोहन लाल ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि समाचार रिपोर्टों अनुसार गत तीन वर्षों में 375 दवाएं अमानक पाई गई जबकि 58 दवाइयां नकली पाई गई। गत 5 वर्षों में निशुल्क दवा योजना में शामिल 700 दवाइयां, जो कि राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन के द्वारा सरकारी अस्पतालों में वितरण की गई, भी अमानक पाई गई।
उन्होंने मांग की है कि तत्काल राज्य के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं ड्रग कंट्रोलर को निलंबित करने, सभी अमानक दवाएं अस्पताल व ड्रग स्टोर में सप्लाई से रोकी जाए, राजस्थान निशुल्क दवा योजना अंतर्गत मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता जांच की जाए। राज्य स्तरीय विशेष जांच दल का गठन किया जाए, जो अमानक एवं नकली दवाओं के निर्माण और बिक्री की सम्पूर्ण जांच करे।
उन्होंने कहा कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों एवं दवा आपूर्ति चैनलों की स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही दोषी कंपनियों एवं वितरकों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए। दवा गुणवत्ता का प्रत्येक तिमाही में बुलेटिन जारी किया जाए। राजस्थान जैसे बड़े राज्य में दवा गुणवत्ता का यह संकट वस्तुतः एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति के समान है, इस पर त्वरित, ठोस और पारदर्शी कार्यवाही आवश्यक है ताकि नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं प्राप्त हो सकें।


