ग्रामीण जीवन को समृद्ध बनाने में देवेंद्र कुमार गुप्‍ता के प्रौद्योगिकी प्रयोग आज भी उतने ही प्रासंगिक है : पद्मविभूषण चंडी प्रसाद भट्ट

ग्रामीण प्रौद्योगिकी के पुरोधा देवेंद्र भाई गुप्ता की जन्मशताब्दी वर्ष पर दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय संगोष्ठी सम्‍पन्‍न

कुमार सिद्धार्थ की रिपोर्ट

नई दिल्ली,31 अगस्‍त। ‘डॉ. देवेन्द्र कुमार गुप्‍ता जमीन से जुड़े सच्चे गांधीवादी वैज्ञानिक थे। जिनसे हमेशा प्रेरणा मिलती रहती थी और जब भी कठिन दौर आता था तो उनका मार्गदर्शन और सहयोग हमारे कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलता था। उनके विचार और कार्य आज भी प्रासंगिक हैं, नए संदर्भ में उसे आगे बढ़ाए जाने की जरूरत है।’

उक्‍त उद्गार सर्वोदय आंदोलन में संलग्‍न, चिपको आंदोलन के प्रणेता, ख्‍यातनाम पर्यावरणविद् पद्मविभूषण चंडीप्रसाद भट्ट ने व्‍यक्‍त किया। वे आईआईटी दिल्‍ली के सभागार में ग्रामीण प्रौद्योगिकी के पुरोधा देवेंद्र कुमार गुप्ता की जन्मशताब्दी वर्ष समारोह के मुख्‍य वक्‍ता के रूप में बोल रहे थे। इस मौके पर जैन मुनि डॉ. अभिजीत कुमार, मुनि जाग्रति कुमार, आईआईटी दिल्‍ली के सीआरडीटी के डॉ. वी.के; विजय, आईआईटी, मुंबई के निदेशक डॉ. शिरीष केदारे, देंवेंद्र भाई के सुपुत्री डॉ. विभा गुप्‍ता, पुत्र राजीव गुप्‍ता विशेष वक्‍ता के तौर पर उपस्थित थे।

92 वर्षीय चंडी प्रसाद भटट ने कहा कि डॉ. देवेंद्र भाई जीवनपर्यंत गांवों के विकास के लिए समर्पित रहे। विज्ञान और तकनीकी कैसे आमजन के जीवन स्तर को बेहतर बना सकती है इसके लिए आजीवन सक्रिय रहे। गांधी,विनोबा और कुमारप्‍पा के विचारों के साथ गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के उनके प्रयोग आज भी प्रेरणादायी है।

उन्‍होंने देवेंद्र भाई का स्‍मरण करते हुए कहा कि 1970 की अलकनंदा नदी की प्रलयकारी बाढ़ के दौरान दूरदराज के प्रभावित परिवारों की मदद के लिए आगे आने की बात हो या जंगलों को बचाने के लिए चिपको आन्दोलन, हर संघर्ष और रचना में देवेंद्र भाई ने आमजन का बढ़ चढ़ कर साथ दिया। उनकी जन्म शताब्दी वर्ष निमित्त आयोजन में मुझे आज फिर से इन महान विभूति का स्मरण और श्रद्धा सुमन अर्पित करने का अवसर मिला।

चिपको आंदोलन के दौर का स्मरण करते हुए श्री भट्ट ने कहा कि डॉ. देवेन्द्र भाई की मदद से ही चिपको आंदोलन के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी की अध्यक्षता के लिए वनस्पति विज्ञान डॉ. वीरेंद्र कुमार की खोज का कार्य सम्पन्न हुआ। श्री भट्ट ने 1970 की अलकनंदा की बाढ़ में राहत कार्य में लोकप्रकाश जयप्रकाश नारायण की सहायता से लेकर 1968 में अखिल भारतीय सीमा क्षेत्र समन्वय समिति की गोपश्वर में आयोजित बैठक के दौर का स्मरण किया और कहा कि गोपेश्वर जैसे एक छोटे से गांव में लोकनायक जयप्रकाश नारायण समेत देश की महान विभूतियों के आगमन से हमारे कार्यक्रम सहज और सफल बने।

विज्ञान, तकनीक और समाज सेवा का सुंदर मेल उनके व्‍यक्तित्‍व में था- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने अपने वर्चुअल संबोधन में डॉ. देवेंद्र गुप्‍ता के साथ उस दौर में नागपुर में किेये कार्यों का स्‍मरण किया। श्री गडकरी ने कहा कि नागपुर विद्यापीठ में विद्यार्थी के नाते मुझे अनेक बार वर्धा जाने का अवसर मिला।  और डॉ. गुप्‍ताजी का जीवन व्‍यक्तित्‍व नजदीक से भी जाना समझा। विज्ञान, तकनीक और समाज सेवा का सुंदर मेल उनके व्‍यक्तित्‍व में था। मध्‍यप्रदेश के इंदौर स्थित छोटे से माचला गांव में एक दशक बिताया और आचार्य विनोबा भावे का भूदान आंदोलन में देवेंद्र भाई ने विशेष कर भूमिहीन गरीब के जीवन को कैसे बदल सकते है इस समर्पण के साथ उन्‍होंने कार्य शुरू किया।

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श्री गडकरी ने कहा कि देवेंद्र भाई की जो विज्ञान के बारे में समझ थी,उसका उपयोग उन्‍होंने ग्रामीणों की उन्‍नति के लिए विज्ञान और प्रौषेगिकी का उपयोग कैसे करनाए इसका उत्‍तम उदाहरण देवेंद्र भाई थे। विज्ञान जन जन के जीवन को बदल सकता है यह उनका विश्‍वास था। उन्‍होंने 30 हजार से अधिकारी कारागारों को प्रशिक्षित किया और कारागारी पंचायत काभी आंदोलन शुरू किया। उनके कारण कारागिरों को बडा सम्‍मान भी मिला। सबको समान अवसर मिलना जरूरी है यह उनका कहना था और आत्‍म निर्भर भारत बनना, और आत्‍म निर्भर गांव बनना उनका एक सपना था। और इसी लिए गांवों का विकास किसानों का विकास, हैण्‍डलूम हैडीका्रफट का विकास और प्रौद्योगिकी का उपयोग ये बात वे लगातार करते रहे।      

देवेन्द्र भाई जन्मशताब्दी समारोह के प्रमुख एवं सीडीआरआई, लखनऊ के पूर्व उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र मेहरोत्रा ने बताया कि यह राष्‍ट्रीय संगोष्ठी देवेंद्र भाई गुप्‍ता के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की उनकी परिकल्पना को आज के संदर्भों में समझने का अवसर होगी।

पुस्तक विमोचन और पारिवारिक स्मृतियाँ

इस अवसर पर देवेंद्र भाई गुप्‍ता के व्‍यक्तित्‍व–कृतित्‍व पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन चंडी प्रसाद भट्ट, जैन मुनि डॉ. अभिजीत कुमार, मुनि जागृत कुमार, दिल्ली, विभा गुप्‍ता आदि ने किया।

मगन संग्रहालय वर्धा की निेदेशक डॉ. विभा गुप्ता, वरिष्‍ठ पत्रकार गार्गी परसाई और राजीव गुप्ता देवेंद्र भाई गुप्‍ता के जीवन और कर्म से जुडे पहलुओं को साझा किया। अपने पिताजी के जीवन मूल्‍यों को रखते हुए कहा कि उन्‍होंने आजीवन बच्‍चों को अहिंसक रूप से पालन पोषण किया। उन्‍होंने सोते हुए कभी बच्‍चों को नहीं उठाया, चाहे परीक्षा का वक्‍त हो या ट्रेन/हवाई जहाज का वक्‍त हो। उन्‍होंने बच्‍चों से कभी नहीं पूछा ही परीक्षा में उत्‍तीर्ण हुए या फेल। न ही कभी घर में बच्‍चों के सामने कभी कोई वस्‍तु तोडी हो, कागज फाडा हो। इससे इस तरह की प्रवृत्ति बच्‍चों में विकसित न हो इसका विशेष ख्याल रखते थे। वे कभी नाराज भी होते थे तो उपवास करते थे। जिससे नाराज होते थे उसे वे प्‍यारी सी चिट्ठी लिखते थे।  

एक घटना का स्‍मरण करते हुए विभा ने कहा कि 13 साल की उम्र में मुझे असम के एक युवा कैंप में छोडने के लिए रेल्‍वे स्‍टेशन आए। और कहा कि अब से बोगी की जिम्‍मेदारी तुम्‍हारी। मैं पूरी यात्रा भर तरह तरह के सेवाकार्य करती रही। इस तरह की प्रक्रिया से लीडर बना दिया और विश्‍वासु बनाया। हम आज हर  आदमी को संदेह की नजी से देखते है। इस संदेह को दूर करने का नजरिया उन्‍होंने दिया। इस मौके पर देवेंद्रभाई के व्‍यक्तित्‍व /कृतित्‍व पर वरिष्‍ठ पत्रकार गार्गी परसाई और राजीव गुप्‍ता ने भी अपनी अपनी बातें साझा कीं।    

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शुभारंभ सत्र में भूतपूर्व उपनिदेशक, सीडीआरई, लखनउ के डॉ. नरेंद्र मेहरोत्रा ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवा वैज्ञानिक आंदोलन में देवेन्द्र भाई की भूमिका पर अपने विचार विस्‍तार से रखे। उन्‍होंने युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्‍साहन देने के सफर को रखते हुए कहा कि ग्रामीण प्रौद्योगिकी के लिए कई छोटी छोटी योजनाएं शुरू हुई। उन्‍होंने कहा कि नीति में बदलाव का अधिकारी वही व्‍यक्ति हो सकता है, जिसने उस क्षेत्र में लंबा कार्य का अनुभव लिया हो। कुमारप्‍पा, देवेंद्र भाई इसके उदाहरण थे।

आईआईटी, मुंबई के निदेशक डॉ. शिरीष केदारे ने प्रौद्योगिकी में जन भागीदारी को केंद्र में रखकर कहा कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले खतरों से निपटने के लिए जमीनी स्‍तर के लोग कैसे स्‍वीकार करें, जागरूक हो और स्‍थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग करना उनकी समझ को बढाना है।   

सीआरडीटी,आईआईटी के प्रो. वी.के. विजय ने ‘उन्नत भारत अभियान से देवेंद्र भाई के  ग्रामीण प्रौद्योगिकी के सपने पूरे करने के प्रयास पर अपने विचार रखे। उन्‍नत भारत अीिायान आज 4440 संस्‍थाओं के माध्‍यम से 21000 गांवों में समुदाय के विकास के लिए कात कर रहे है। आगे प्रयास है कि 55000 कॉलेज 7 लाख गांवों को जोड पाए जिसमें कारीगिरी, किसानों के परंपरागत ज्ञान को संजो सकेंगे। ये कल्‍पना देवेंद्र भाई की प्रेरणा से उभरती है।

जैन मुनि डॉ. अभिजीत कुमार, मुनि जागृत कुमार, दिल्ली अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि देंवेंद्र भाई के जीवन में जैनत्‍व झलकता है, भारतीय संस्‍कृति झलकती है। उन्‍होंने जीवन के हर क्षण में स्‍माइल की अवधारणा को साकार करने के लिए संकल्प भी दिलाया।  

विशेषज्ञों के विचार और अकादमिक सत्र

समारोह के दूसरे सत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं समग्र सतत विकास विषय पर चर्चा की गई। इस सत्र में एमएसएमई में अन्वेषण का महत्त्व विषय पर डॉ. दिलीप पेशवे, एनआईआईटी, नागपुर, गांधीग्राम ग्रामीण विश्वविद्यालय में समग्र ग्रामीण विकास हेतु देवेन्द्र भाई की भूमिका विषय पर गांधीग्राम ग्रामीण विश्वविद्यालय, मदुरै के विभागाध्यक्ष गाँधी विचार डॉ. आर मणि, गांधी, कुमारप्पा और देवेन्द्र भाई के दृष्टिकोण और वर्तमान में ग्रामीण अर्थव्यवस्था विषय पर सीएसवी, वर्धा के अध्यक्ष श्री अजय कुमार अपने विचार विचार साझा किए। इस सत्र की अध्‍यक्षता प्रो. शिरीष केदारे, निदेशक, आईआईटी, मुंबई ने की।

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राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी के अपराह्न सत्र में समग्र ग्रामीण विकास, युवा और वर्तमान संभावनाएँ विषय पर चर्चाएं की गई। समग्र ग्रामीण विकास हेतु टिकाऊ प्रौद्योगिकियाँ पर आईआईटी, दिल्ली के विभागाध्यक्ष आरडीएटी डॉ. विवेक कुमार ने विस्‍तार से अपनी बात कहीं।  समग्र ग्रामीण विकास में शैक्षणिक तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों की भूमिका विषय पर उन्नत भारत अभियान, गांधीग्राम ग्रामीण विश्वविद्यालय, मदुरै के  विभागाध्यक्ष एवं प्रभारी डॉ. के. रविचंद्रन, ग्रामीण विकास हेतु प्रौद्योगिकी विकास में अन्वेषण का महत्त्व पर आईआईटी दिल्ली के प्रो. विजय एम् चारिअर ने अपने विचारों को प्रस्‍तुत किया। इस सत्र में अध्‍यक्षता झारखंड के श्री कृपा प्रसाद सिंह ने की। इस सत्र में  आईजीएनसीए, दिल्ली के अध्‍यक्ष एवं वरिष्‍ठ पत्रकार श्री राम बहादुर राय ने वचुवल संबोधन से अपनी बात कहीं।

कार्यक्रम के दौरान दिल्‍ली आईआईटी के युवा छात्रों ने ग्रामीण विकास प्रौद्योगिकी से जुडे अपने प्रयोगों को संक्षिप्‍त में साझा किया, जिसे श्रोताओं ने सराहा।    

इस सत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थाओं में ग्रामीण विकास हेतु युवाओं की भूमिका पर चर्चा होगी  जिसमें श्री भारत डोगरा, श्री प्रभाकर पुसदकर, सुश्री तन्‍वी सिहं ने अपने विचार रखे। सत्र का संयोजन भूतपूर्व कुलपति माँ वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, जम्मू डॉ. रमेश बामेजई और सर्वोदय प्रेस सर्विस (सप्रेस), इंदौर श्री कुमार सिद्धार्थ प्रतिवेदक का जिम्‍मा संभाला।

संगोष्‍ठी के समापन सत्र में समग्र ग्रामीण विकास हेतु ‘डिज़ाइन थिंकिंग’ के अनुभव पर मिशन समृद्धि, चेन्नई के सीईओ श्री राम पप्पू राव, विशेष अतिथि के रूप में संबोधन बिहार के सांसद श्री सुधाकर सिंह ने वर्चुवल संबोधन से देवेंद्र भाई के कार्यों का स्‍मरण किया। समापन समारोह में विशेष अतिथि के रूप में समृद्ध भारत अभियान, भरतपुर के श्री सीताराम गुप्ता ने अपना सारगर्भित अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। संगोष्‍ठी से उभरी संस्‍तुतियों को रखते हुए डॉ. मेहरोत्रा ने कहा कि आज की परिस्थितियों में देवेंद्र भाई के  विचारों और प्रयोगों को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है इसका रोड मेप साझा किया। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यक्रम से निकले निष्कर्ष ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता और टिकाऊ विकास के लिए नई दिशा देंगे।

समारेाह के प्रारंभ में गांधी शांति प्रतिष्‍ठान से संबंद्ध रहे और देवेंद्र भाई के साथी रमेश शर्मा ने स्वागत गीत प्रस्‍तुत किया। आईआईटी दिल्ली के विभागाध्‍यक्ष, सीआरडीटी प्रो. विवेक कुमार स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर देशभर के कई शिक्षाविद, युवा वैज्ञानिक, समाजसेवी, विद्यार्थी, राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से जुडे अनेक युवा बडी संख्‍या में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथि वक्‍ताओं को खादी का दुपटटा और प्रतीक चिन्‍ह भेंट कर सम्‍मानित किया। कार्यक्रम के अंत में देंवेंद्र भाईजन्‍म शताब्‍दी समारोह के संयोजक एवं खादी ग्रामोद्योग के बोर्ड के पूर्व सदस्य बंसत सिंह ( मुंगेर) ने सभी के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की और आभार व्‍यक्‍त किया।

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