331वीं किसान पंचायत में देशभर के किसान नेताओं ने जताई गहरी चिंता
12 जुलाई। किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 331वीं किसान पंचायत का आयोजन व्यापक भागीदारी और गंभीर चर्चाओं के साथ सम्पन्न हुआ। इस महत्त्वपूर्ण पंचायत में देश के विभिन्न राज्यों से किसान नेता, संगठनों के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। पंचायत का फोकस भारतीय कृषि क्षेत्र में गहराते संकट, भूमि अधिग्रहण की मनमानी प्रक्रिया, बढ़ती महंगाई, पर्यावरणीय जोखिम और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन पर रहा।
पंचायत को संबोधित करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री सुश्री मेधा पाटकर ने कहा कि “आज देश में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसानी बचेगी?” खेती लगातार घाटे का सौदा बन रही है और किसान अपनी ज़मीन बेचने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज जब महंगाई चरम पर है, तो न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं, सर्वोत्तम मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने कार्पोरेट कंपनियों द्वारा ज़मीन की खरीद को “भूमि को सोना समझने की प्रवृत्ति” बताया और चेताया कि इससे सामाजिक और आर्थिक असंतुलन गहराएगा।
उन्होंने जैविक खेती और स्वावलंबी कृषि की ओर लौटने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। “अजैविक खेती का कचरा हमारे जल, वायु और ज़मीन को ज़हरीला बना रहा है”, उन्होंने कहा।
महाराष्ट्र से अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉ. राजन क्षीरसागर ने कहा कि सरकार अमेरिकी टैरिफ धमकियों के आगे झुक रही है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन की कीमत एमएसपी से 1000 रु. कम मिलने लगी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। एक सप्ताह में महाराष्ट्र में 700 से अधिक किसानों की आत्महत्या चौंकाने वाली है। उन्होंने वन्य और आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या को भी प्रमुख संकट बताया।
पंजाब से भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के उपाध्यक्ष अवतार सिंह ग्रेवाल ने कहा कि “लैंड पूलिंग नीति ने पंजाब के किसानों की नींव हिला दी है।” उन्होंने 14 जुलाई को इसकी रणनीति तय करने और 20 जुलाई को लुधियाना में बड़ी ट्रैक्टर रैली निकालने की घोषणा की।
किसंस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह (हरियाणा) ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र को बचाना प्राथमिकता है। वोटर लिस्ट से नाम काटने की घटनाएं पूरे देश में सामने आ रही हैं। उन्होंने नूह जिले के 1600 एकड़ भूमि अधिग्रहण में कानून के उल्लंघन की बात भी कही।
एड. आराधना भार्गव ने कहा कि 20 जुलाई को दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में एमएसपी की गारंटी, ऋण मुक्ति, और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाएंगे।
अ भा किसान महासभा ने प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद दास बैरागी ने भारत-अमेरिका कृषि समझौते को “भारतीय किसानों के हितों के विरुद्ध” बताते हुए उसकी निरस्तीकरण की मांग की और ट्रेड यूनियनों के साथ व्यापक संघर्ष के समन्वय पर बल दिया।
बरगी बांध विस्थापित संघ के राजकुमार सिन्हा ने बताया कि अमेरिका भारतीय कृषि बाजार में दखल चाहता है। इससे स्थानीय अनाज की कीमतों और किसानों की आजीविका पर विपरीत असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नर्मदा घाटी में प्रस्तावित राघवपुर बहुउद्देशीय परीयोजना के 48 गांव की भूमि अधिग्रहण हेतु ग्राम जुनवानी माल के 141 कृषकों की 311.525 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण करने के लिए धारा – 19 की अधिसूचना जारी हुआ है। इसी प्रकार बसनिया,अपर नर्मदा,अपर बुढनेर और मोरांड – गंजाल बांधों में भू अर्जन की प्रक्रिया को बढ़ाया जा रहा है जबकि ग्राम सभा जमीन देने को तैयार नहीं है।
गुजरात से किसान नेता भरतसिंह झाला ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह किसानों की सहमति के बिना पवन चक्कियां और विद्युत टावर जबरन खेतों में लगा रही है।
संकिमो सिवनी के संयोजक डी. डी. वासनिक ने कहा कि खाद की भारी किल्लत है और किसान शेर के आतंक से भयभीत हैं। उन्होंने वन्य क्षेत्र की सीमा पर बाड़ लगाने और अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों का शीघ्र सर्वे कराने की माँग की।
भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप ठाकुर (सागर) ने नकली खाद और बीज के व्यापार पर चिंता जताते हुए उन्होंने आरबीसी 6(4) के अंतर्गत पंचनामा सर्वे और तत्काल मुआवज़े की माँग की।
पंजाब किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह भिक्की ने बताया कि पंजाब में 65,635 एकड़ उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई है, जिसके एवज में किसानों को सालाना 30,000 रु. प्रति एकड़ के ठेके पर गुजारा करने को कहा गया है। डेवलपमेंट के बाद 1000 गज का प्लाट मकान हेतु तथा 200 से 250 गज शोरूम हेतु प्लाट दिया जाएगा। इससे किसानों में चिंता है कि जमीन चली जाएगी, उस पर न तो लोन मिल पाएगा न बेच सकेंगे। उन्होंने कहा कि 18 जुलाई को चंडीगढ़ में किसान भवन में बैठक कर इस मुद्दे पर राय ली जाएगी।
पंचायत का लाइव प्रसारण बहुजन संवाद यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज के माध्यम से किया गया। पंचायत का संचालन एड. शिवसिंह और एड. आराधना भार्गव ने संयुक्त रूप से किया।


