लाखों बच्चियों को शिक्षा से जोड़ने वाली संस्था को मिला एशिया का सर्वोच्च सम्मान
नई दिल्ली। भारत में शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण कार्य कर रही गैर-सरकारी संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ (Educate Girls) को वर्ष 2025 का 67वां रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड प्रदान किया गया है। एशिया के इस सर्वोच्च सम्मान को पाने वाली यह पहली भारतीय संस्था बन गई है। संगठन को यह सम्मान उन लड़कियों को पुनः शिक्षा से जोड़ने और बालिका शिक्षा के प्रसार में योगदान देने के लिए दिया गया है, जो किसी कारणवश स्कूल छोड़ चुकी थीं।
2 करोड़ बच्चियों को फिर से स्कूल भेजा
एजुकेट गर्ल्स की स्थापना के बाद से अब तक संगठन ने 20 लाख से अधिक बच्चियों को स्कूल लौटाया है और लगभग 24 लाख बच्चों की पढ़ाई में सुधार किया है। संस्था का दावा है कि अपने कार्यक्षेत्र में उसने शिक्षा के अधिकार और लड़कियों की भागीदारी को बढ़ाने में ठोस असर डाला है। संगठन के प्रयासों से देशभर में अब तक 2 करोड़ से अधिक बच्चियां शिक्षा से जुड़ चुकी हैं।
सफीना हुसैन – एक महिला का संकल्प
इस संस्था की नींव 2007 में सफीना हुसैन ने रखी। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई करने के बाद वे कई साल सैन फ्रांसिस्को में रहीं और चाइल्ड फैमिली हेल्थ इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक रहीं। लेकिन उन्होंने भारत लौटकर ग्रामीण इलाकों में बच्चियों की शिक्षा को लेकर काम करने का निश्चय किया।
राजस्थान से शुरुआत करते हुए, सफीना और उनकी टीम ने उन समुदायों की पहचान की, जहाँ लड़कियों का स्कूल में नामांकन बेहद कम था। घर-घर जाकर उन्होंने अभिभावकों को समझाया, और बालिका शिक्षा के महत्व को सामने रखा। धीरे-धीरे उनका अभियान राजस्थान से निकलकर देश के विभिन्न राज्यों तक फैला।
‘टीम बालिका’ बना आंदोलन
एजुकेट गर्ल्स ने ‘टीम बालिका’ नाम से एक सामुदायिक नेटवर्क खड़ा किया, जिसमें आज 55,000 से अधिक वालंटियर्स शामिल हैं। ये वालंटियर्स गांव-गांव जाकर परिवारों को समझाते हैं कि लड़कियों की शिक्षा क्यों जरूरी है। टीम बालिका ने घर-घर जाकर बेटियों को स्कूल भेजने का माहौल तैयार किया।
विकास के नए मॉडल – DIB और प्रगति
2015 में संगठन ने शिक्षा क्षेत्र में दुनिया का पहला डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड (DIB) लॉन्च किया। इस मॉडल में निवेशक किसी सामाजिक परियोजना को फंड करते हैं और अगर तय लक्ष्य पूरे होते हैं तो उन्हें रिटर्न मिलता है। यह प्रयोग शुरू में 50 गांवों तक सीमित था, लेकिन बाद में हजारों गांवों में फैल गया।
इसके अलावा, संगठन ने ‘प्रगति’ (Pragati) ओपन-स्कूलिंग कार्यक्रम भी शुरू किया। यह 15 से 29 साल की उन महिलाओं के लिए है, जिन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। पहले बैच में जहां केवल 300 लड़कियां थीं, वहीं अब संख्या बढ़कर 31,500 से अधिक हो चुकी है।
30 हजार गांवों तक पहुंच

एजुकेट गर्ल्स ने अब तक भारत के 30,000 से अधिक गांवों में काम किया है। यह संगठन केवल बालिकाओं को स्कूल वापस लाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और सीखने की गुणवत्ता पर भी ध्यान देता है। संस्था का लक्ष्य अब अगले कुछ वर्षों में एक करोड़ से अधिक बच्चों तक पहुँचना है और शिक्षा के जरिए गरीबी और अशिक्षा के दुष्चक्र को तोड़ना है।
रेमन मैग्सेसे अवार्ड फाउंडेशन ने अपने बयान में कहा कि एजुकेट गर्ल्स को यह सम्मान लड़कियों और युवतियों की शिक्षा के ज़रिए सांस्कृतिक रूढ़िवादिता को तोड़ने और उन्हें अपनी पूरी मानवीय क्षमता हासिल करने के अवसर देने के लिए दिया गया है। वास्तव में यह पुरस्कार उस बदलाव की पहचान है जो किसी राजधानी या बड़े शहर से नहीं, बल्कि एक दूरस्थ गाँव की एक अकेली लड़की से शुरू हुआ और धीरे-धीरे पूरे समुदायों को नया रूप देने लगा।
एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो का कहना है कि शिक्षा विकास के सबसे बड़े साधनों में से एक है और यह हर लड़की का मौलिक अधिकार है। उनका मानना है कि यह पुरस्कार उस परिवर्तनकारी बदलाव की मान्यता है जिसे सरकार, कॉर्पोरेट जगत, परोपकारी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर हासिल किया गया है।
अब तक किन्हें मिला यह सम्मान
रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड उन व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है जिन्होंने साहस, रचनात्मकता और समाज सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया हो। इस वर्ष एजुकेट गर्ल्स के अलावा मालदीव की शाहिना अली और फिलीपींस के फादर फ्लावियानो एल. विलनुएवा को भी यह सम्मान दिया गया है। शाहिना अली को प्लास्टिक प्रदूषण और समुद्री जीवन की रक्षा के लिए और फादर विलनुएवा को मनीला के गरीब और बेघर लोगों की सेवा के लिए सम्मानित किया गया।
मनीला में समारोह 7 नवंबर को
यह पुरस्कार 7 नवंबर 2025 को फिलीपींस की राजधानी मनीला के मेट्रोपॉलिटन थिएटर में आयोजित होने वाले 67वें रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड समारोह में दिया जाएगा। विजेताओं को मेडल और सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे। समारोह को फाउंडेशन के आधिकारिक फेसबुक और यूट्यूब चैनल पर सीधा देखा जा सकेगा।
इस अवॉर्ड के साथ एजुकेट गर्ल्स का नाम उन हस्तियों के साथ जुड़ गया है, जिन्हें समाज सुधार और मानवीय सेवा के लिए जाना जाता है। अब तक 56 भारतियों को यह पुरस्कार मिल चुका है। उनमें डॉ. आर. रवि कन्नन (2023), रवीश कुमार (2019), और सोनम वांगचुक (2018) शामिल हैं। अन्य प्रमुख विजेताओं में मदर टेरेसा (1962), सत्यजीत रे (1967), इला भट्ट (1977), बाबा आमटे (1985), किरण बेदी (1994), और अरुणा रॉय (2000), जयप्रकाश नारायण (1965), राजेंद्र सिंह (2001), दीप जोशी (2009) आदि शामिल हैं।
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की स्थापना अप्रैल 1957 में हुई थी। यह पुरस्कार फिलीपींस के दिवंगत राष्ट्रपति रेमन मैग्सेसे की स्मृति में दिया जाता है। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार एशिया का प्रमुख पुरस्कार और सर्वोच्च सम्मान है।


