डॉ वीर सिंह

अब भी बचाई जा सकती है – धरती

हर साल बाढ, सूखा, आंधी, गर्मी, बर्फवारी और तूफानों जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बढने का एक मतलब यह भी है कि हमने एक वैश्विक समाज की हैसियत से धरती पर रहना अब तक नहीं सीखा है। एक तरफ, हमारे कार्य-कलाप…

क्या पूर्व-निर्धारित है, पृथ्वी की मृत्यु?

भारतीय उप-महाद्वीप की ज्ञान-परंपराओं में किसी भी जीवधारी की जीवन-मृत्‍यु पूर्व निर्धारित मानी जाती हैं, लेकिन अब आधुनिक विज्ञान भी इसे मानने लगा है। ताजा शोधों ने उजागर किया है कि प्रकृति में बेजा मानवीय हस्‍तक्षेप के चलते यह पूर्व-निर्धारित…

जरूरी है, जैव-विविधता का जीवन

जैव-विविधता इंसानों समेत समूची सचराचर धरती के विकास में अहमियत रखती है, लेकिन उसे इंसानों से ही सर्वाधिक खतरा भी है। अपनी खाऊ-उडाऊ विकास पद्धति पर अटूट भरोसा करने वाला इंसान यह तक भूलता जा रहा है कि जैव-विविधता की…