अपने हाथ से खुद की बदहाली करने का एक और उदाहरण हमारा पडौसी देश श्रीलंका है। वैसे तो पूंजी केन्द्रित मौजूदा आर्थिक ताने-बाने में कई देश, खासकर ‘तीसरी दुनिया’ कहे जाने वाले देश, लगातार बदहाली की गर्त में डूबते जा…
अपने समाज, देश और दुनिया के मौजूदा संकटों के निवारण के लिए महात्मा गांधी से पूछा जाता तो वे संभवत: इंग्लेंड और दक्षिण-अफ्रीका के बीच की जहाज-यात्रा के दौरान करीब 112 साल पहले लिखी अपनी किताब ‘हिन्द स्वराज’ के पन्ने…
तीन साल पहले एकरूपता की खातिर लगाए गए ‘जीएसटी’ ने तमाम छोटे-बडे व्यापारियों, आम खरीददारों और सरकारी अमले में से किसी को संतुष्ट नहीं किया है। आखिर क्या है, ‘जीएसटी’ का तिलिस्म? प्रस्तुत है, इस विषय की विस्तृत पड़ताल करता…
कृषि से केवल 16% जीडीपी आती है जब कि उसमें 65% लोग कार्यरत है और कृषि समेत कुल अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत लोग 92 % है जबकि इससे जीडीपी में केवल 54 % आती है। इस प्रकार जीडीपी का मोटा…