कोरोना महामारी के दौरान सर्वाधिक याद किया जाने वाला तत्व ऑक्सीजन या प्राणवायु रहा है जो हमारे आसपास के पेड-पौधों की मेहरबानी से वायुमंडल में इफरात में मौजूद है, लेकिन उसके साथ हम क्या करते हैं? ‘केजी-1’ में पढने वाले…
कोविड-19 महामारी के दौर में कई तरह की पोल-पट्टियों के खुलासा होने में दवा कंपनियों के मुनाफे की हवस भी शामिल है। थोडी गहराई से देखें तो हमारा स्वास्थ्य चिकित्सकों की बजाए उन दवा कंपनियों के नुमाइंदों के हाथ में…
तरह-तरह की वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और समाजशास्त्रीय शोधें चीख-चीखकर बता रही हैं कि हमारी मौजूदा जीवन पद्धति दरअसल आत्महंता है और इसे बरकरार रखा गया तो बहुत जल्द मानव जाति को अपने अस्तित्व के संकट से दो-चार होना पडेगा। क्या हम…
पिछले दिनों मध्यप्रदेश के एक गांव में खुल्लमखुल्ला पुलिस हिंसा की जो खबरें आई हैं उसने दलितों की बदहाली, पुलिस सुधार, जमीनों की नाप-जोख में वन और राजस्व विभागों की लापरवाही, वनाधिकार कानून जैसे कई सवालों को खडा कर दिया…
रोजगार मुहैया कराने के लिए सरकारों की ओर से दावे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन रोजगार फिर भी दूर की कौड़ी ही साबित हो रहे हैं। संगठित और असंगठित क्षेत्रों में जो रोजगार थे, वे भी धीरे-धीरे खत्म हो…
दुनियाभर के बाजारों और उनकी मार्फत वैश्विक राजनीति को प्रभावित करने वाले ‘ग्रूप-20’ के देश भी अब जलवायु परिवर्तन के प्रलयंकारी प्रभावों की चपेट में आते जा रहे हैं, लेकिन उनका सरगना अमेरीका अपने मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद…