दिनों-दिन बढ़ते-फैलते शहर धीरे-धीरे हमारे जीवन के विपरीत और असहनीय होते जा रहे हैं। कोविड-काल में हजारों-हजार मजदूरों ने महानगरों से वापस अपने-अपने गांवों की ओर लौटकर इसकी तस्दीक भी की है। तो क्या शहरों को छोड़कर जीवन की कोई…