आजकल कैंसर और उस जैसी अनेक गंभीर बीमारियों के विस्फोट ने हमारे खान-पान पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी दौर में पता चल रहा है कि पूंजी की अपनी हवस में पागल हो रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने ‘जीनेटिकली…
जहां देशी बीज और परम्परागत खेती जिन्दा है, वहां परम्परागत खेती और किसान भी जिन्दा है। स्थानीय मिटटी, पानी के अनुकूल देशी बीजों की परम्परागत विविधता की संस्कृति को सामने लाये जाने और ऐसी परंपरागत खेती की पद्धतियों प्रचलित है,…
‘कोविड-19’ के इलाज के लिए वैक्सीन यानि ‘टीका’ की अहमियत उजागर हुई है, लेकिन क्या विशाल पैमाने पर इसका निर्माण आसान होगा? वे कंपनियां जो धंधे की खातिर झूठे आंकडों से बीमारी की गंभीरता स्थापित करने से लगाकर खुद बीमारी…
कोरोना वायरस से होने वाली ‘कोविड-19’ बीमारी की मौजूदा अफरा-तफरी में भविष्य के सवाल पूछना लाजिमी है। क्या हम जैसे हैं, वैसे या उससे भी बदतर ‘वापस’ लौट आएंगे? या फिर इस दौर से सीखकर कुछ नया, बेहतर और कारगर संसार रचेंगे? अचानक देश और दुनिया का…
पर्यावरण के संकट, जल-जंगल-जमीन के बाद अब मानवीय जीवन को अपनी गिरफ्त में लेने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में ‘धरती रक्षा दशक’ जैसे आपातकालीन उपायों के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जनवरी 2020 की पहली…
बाजार और उसके लिए विपुल उत्पादन के हल्ले में हमारी खेती धीरे-धीरे अपनी उत्पादकता और गुणवत्ता खोती जा रही है। अब ना तो रासायनिक खाद, दवाओं, कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से मुक्त फसलें बची हैं और ना ही उसे पैदा करने…