समाजवाद, न्याय और समता के लिए होनेवाले संघर्षों को सोमनाथ जी ( सोमनाथ त्रिपाठी) के निधन से भारी क्षति हुई है। हाल ही में 9 अक्टूबर को कोरोना संक्रमित होने से उनका देहावसान हो गया। जब भी ऐसे संघर्ष आगे…
जलसंकट और रेगिस्तानों के लिए प्रसिद्ध हमारे राजस्थान में एक गांव ऐसा भी है जहां सिर्फ पक्षियों की पूछ-परख होती है। उदयपुर के पास मेनार गांव में विकास की हर योजना पक्षियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई और…
9 अगस्त , विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त का दिन पूरी दुनिया के सभी आदिवासी समाज के लोगों को अपनी भाषा – संस्कृति, खान-पान, जीवन शैली व स्वशासन – परम्परा के संरक्षण और विकास के साथ-साथ जल – जंगल –…
श्रम आधारित गांव की, खेती की संस्कृति की वापसी हो रही है। गांव की पारंपरिक खान-पान संस्कृति बच रही है। इस तरह की मुहिम को आंगनबाड़ी जैसी योजनाओँ से भी जोड़ा जा सकता है। बाड़ियों में सब्जियों की खेती गांवों…
आदिवासियों की जीवन शैली, उनकी परंपरागत खेती किसानी और जंगल का खानपान का अत्यधिक महत्व है। जंगलों का लगातार कटते जाने का सीधा असर लोगों की खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है। आदिवासियों ने अब जंगल और खेती बचाने के…
शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए अरविन्द गुप्ता अपने तई प्रयासरत हैं। वे शिक्षक, इंजीनियर और वैज्ञानिक हैं। सबको पढ़वाने के लिए उनकी वेबसाइट लोकप्रिय है। वे बच्चों, शिक्षकों में उम्मीद जगाते हैं। उनमें उम्मीद के बीज बोते…
मध्यप्रदेश में आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिले में नर्मदा-तट के गांव ककराना को भी, आसपास के कई गांवों की तरह, सरदार सरोवर परियोजना की डूब का सामना करना पडा था, लेकिन इलाके में सक्रिय ‘खेडूत मजदूर चेतना संगठ’ से जुडे कुछ…
आदिवासी समाज के पास खान-पान का अपना एक तंत्र है। यह अपने आप में पूर्ण है तथा इसी के चलते आदिवासी समाज शताब्दियों से स्वयं को स्वस्थ व प्रसन्न बनाए रखे हुए हैं। आधुनिक औद्योगिक खेती ने मनुष्य से उसकी…