पुस्‍तक ‘365 डिग्री’: विचार, आत्मसंवाद और जीवन-दर्शन की नई परिक्रमा

लेखक संजय अग्रवाल की पुस्तक ‘365 डिग्री’ का विमोचन

इंदौर, 6 अक्टूबर। इंदौर की रविवार की सुबह साहित्य, विचार और आत्मसंवाद की एक खूबसूरत संगति में तब बदल गई, जब लेखक संजय अग्रवाल की पुस्तक ‘365 डिग्री’ का लोकार्पण हुआ।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ आयकर आयुक्त श्री रामकुमार यादव उपस्थित थे। मंच पर उनके साथ वरिष्ठ पत्रकार सुभाष खंडेलवाल, वरिष्ठ कर सलाहकार महेश अग्रवाल, प्रकाशक डॉ. संदीप अग्रवाल और वसंत पारधी भी मौजूद थे। शहर के अनेक साहित्यप्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक के मित्रगण बड़ी संख्या में इस अवसर के साक्षी बने।

कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। रोशनी की लौ ने जैसे पूरे वातावरण को आत्मीयता और ऊर्जा से भर दिया। किसी ने कहा  “दीया सिर्फ़ जलता नहीं, वह सब्र भी सिखाता है।” यही भावना उस ज्ञान का प्रतीक थी, जो पुस्तक के माध्यम से पाठकों तक पहुँचना था।

इसके बाद संगीत गुरुकुल के संस्थापक पंडित जसराज जी के शिष्य पंडित गौतम की शिष्या वैशाली ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल में भक्ति और शांति का रंग घुल गया।

‘365 डिग्री’ – विचारों की यात्रा

पुस्तक के प्रकाशक अराइजिंग मीडिया के डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि ‘365 डिग्री’ की यात्रा नागपुर से शुरू होकर भोपाल होते हुए अब इंदौर पहुँची है। उन्होंने कहा, “यह किताब शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन को हर दिन नए ढंग से देखने का निमंत्रण है। जब सूचनाओं की बाढ़ हो, तब विचारों की स्पष्टता सबसे बड़ी पूँजी बन जाती है — यही इसकी असली खूबी है।”

उनके साथी वसंत पारधी ने जोड़ा “यह पुस्तक केवल लेखक की नहीं, संवाद की यात्रा है। इंटरनेट की दुनिया से लेकर जीवन की वास्तविकता तक — हर जगह यह आत्मसंवाद का पुल बनाती है।” उन्‍होंने कहा ‘संपर्क और संवाद’ साधन की जो एक प्रेरणा संजय अग्रवाल ने दी। संपर्क और संवाद और उसी का समाधान, एक पुस्तक के रूप में संस्करण है। 

लेखक संजय अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा, “इंदौर मेरा कर्मस्थल भी है और प्रेम का शहर भी। यहाँ हर समुदाय, हर व्यक्ति एक-दूसरे से प्रेम करता है — यही इस शहर की आत्मा है।”

उन्होंने आगे कहा, “आज व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के दौर में सूचनाओं की बाढ़ है, लेकिन जरूरी है कि हम सही ज्ञान को पहचानें और उसे जीवन में उतारें। ‘365 डिग्री’ उसी प्रयास का हिस्सा है — कि हम छोटी-छोटी बातों में जीवन का बड़ा अर्थ खोजें।”

मुख्य अतिथि आयकर आयुक्‍त श्री रामकुमार यादव ने कहा कि ‘365 डिग्री’ आज के समय की एक अत्यंत प्रासंगिक पुस्तक है। उन्‍होंने कहा कि “हम ऐसे युग में हैं जब हर क्षण सूचनाओं का विस्फोट होता है। ऐसे में यह पहचानना कठिन हो गया है कि कौन-सी जानकारी हमारे लिए सही दिशा देती है। संजय अग्रवाल ने अपनी रचना में यही बताया है कि परिवर्तन बड़े संकल्पों से नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे सुधारों से आता है। यदि हम हर दिन थोड़ा-थोड़ा सुधार करें, तो जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है।” यह किताब यही सिखाती है कि आप अपने सही रहिए सबके साथ अपना व्यवहार रखिए, अपने आप सब कुछ सही हो जाएगा।

श्री यादव ने कहा कि, “पुस्तकें मौन गुरु की तरह होती हैं — बिना बोले हमें राह दिखाती हैं। ‘365 डिग्री’ भी ऐसी ही गुरु है, जो पाठक को सोचने, ठहरने और आत्ममंथन करने की प्रेरणा देती है।”

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष खंडेलवाल ने अपने खास अंदाज़ में कहा, “आज मुझे लग रहा है कि मैं किताब लिखने वालों, पढ़ने वालों और बेचने वालों — तीनों के बीच बैठा हूँ। जीवन का फलसफा यही है कि एक जीवन में सौ जीवन जीना है तो आप किताबों से जुड़ जाएं।”

उन्होंने कहा, “संजय अग्रवाल की किताब प्रेम, मनन और मंथन की गहराई से भरी है। इसमें सफलता का अर्थ भौतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जीवन का संतुलन और आत्मिक शांति है। इसमें मनुष्य की संवेदना, इंसानियत और प्रेम का मूल भाव है। यही साहित्य का असली उद्देश्य है।”

पाठकों तक पहले ही पहुँची थी ‘आज का चिंतन’

संजय अग्रवाल की डिजिटल पहल ‘आज का चिंतन’ पहले ही सैकडों पाठकों के बीच लोकप्रिय रही है। लेखक के मित्र डॉ. प्रज्ज्वल यादव ने कहा, “हर सुबह जब ‘आज का चिंतन’ पढ़ता हूँ, तो लगता है — यह सिर्फ़ संदेश नहीं, बल्कि जीवन का अभ्यास है। इस किताब ने आज को जीना सिखाया है — न कल का बोझ, न कल की चिंता।”

कार्यक्रम का समापन बापू का प्रिय भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए…” की गूंज के साथ हुआ। पूरा सभागार निस्तब्ध, संतोष और आत्मशांति से भरा था — जैसे हर कोई अपने भीतर किसी ताज़ा हवा को महसूस कर रहा हो।

कार्यक्रम में अतिथि वक्‍ताओं का स्‍वागत संजय-शालिनी अग्रवाल, सुशील पालीवाल, वसंत पारधी ने किया। श्री रवि बाफना जी का स्‍वागत कुमार सिद्धार्थ ने पौधा भेंट कर किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन रंगकर्मी संजय पटेल ने किया, जबकि कार्यक्रम संयोजन का दायित्व राजेश खंडेलवाल ने निभाया।

‘365 डिग्री’ सचमुच उस ताज़ा हवा की तरह है जो विचारों की खिड़कियाँ खोलती है, और यह सिखाती है कि जीवन का हर दिन एक नया कोण रखता है — बस उसे देखने की दृष्टि चाहिए।

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