मछुआरों की समस्याएँ न सुनी गईं तो होगा आंदोलन : श्रमिक मछुआरा संघ की चेतावनी

भोपाल में कल आयोजित होगा जलाशय मछुआरों का वार्षिक अधिवेशन

भोपाल, 11 नवंबर। राज्य मत्स्य महासंघ द्वारा जलाशयों में कार्यरत प्राथमिक मछुआरा सहकारी समितियों के सदस्यों का वार्षिक अधिवेशन बुधवार को भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। इस संदर्भ में मध्यप्रदेश श्रमिक मछुआरा संघ के प्रतिनिधि मुन्ना बर्मन, रमेश नंदा, जितेन्द्र मांझी, श्यामा भारत मछुआरा और राजकुमार सिन्हा ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मछुआरों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

संघ के नेताओं ने बताया कि 90 के दशक में राज्य मत्स्य विकास निगम को समाप्त कर ‘राज्य मत्स्य महासंघ’ का गठन इस उद्देश्य से किया गया था कि जलाशय प्रबंधन और मत्स्य विकास संबंधी गतिविधियाँ स्थानीय सक्रिय मछुआरा प्रतिनिधियों की सहभागिता से संचालित हों। परंतु विगत दो दशकों से अधिक समय से महासंघ के चुनाव नहीं कराए गए हैं और पूरा कार्य प्रशासनिक तौर पर नियुक्त प्रशासक के माध्यम से चल रहा है। परिणामस्वरूप महासंघ की वार्षिक आम सभा अब सवालों और समाधान की जगह केवल औपचारिकता भर रह गई है।

नेताओं ने कहा कि जलाशयों में सही मात्रा में और पारदर्शी तरीके से बीज संचय न होने के कारण लगातार मत्स्य उत्पादन घट रहा है, जिससे मछुआरों की आजीविका संकट में है और कई लोग पलायन को मजबूर हैं। इसके अतिरिक्त मछली पकड़ने की मजदूरी दर वर्षो से पुनर्निर्धारित नहीं की गई है। वर्तमान में 2000 हेक्टेयर से बड़े जलाशयों में मेजर कार्प के लिए 34 रुपये प्रति किलो और माइनर कार्प के लिए 20 रुपये प्रति किलो मजदूरी तय है, जो बाजार दर से बेहद कम है। इससे ठेकेदारों को लाभ होता है, जबकि वास्तविक मछुआरे आर्थिक तंगी झेल रहे हैं।

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प्रेस विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया कि कई जलाशयों पर गैर-मछुआरा समुदाय के प्रभावशाली लोग सहकारी समितियों के माध्यम से कब्जा जमाए बैठे हैं और उन्हें विभागीय अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। साथ ही, राज्य सरकार की ‘बचत सह राहत योजना’ की राशि विगत दो वित्तीय वर्षों से मछुआरों को उपलब्ध नहीं कराई गई है, जबकि यह राशि मछलियों के प्रजनन काल के दौरान आय-रहित महीनों में सहारा के रूप में दी जाती रही है।

बरगी जलाशय का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां 15 अगस्त के बाद मत्स्याखेट कार्य शुरू हो जाना चाहिए था, किंतु अब तक कार्य शुरू नहीं होने से मछुआरे बेरोजगार बैठे हैं। वहीं सरदार सरोवर जलाशय में ‘नर्मदा माता मत्स्य उत्पादन एवं विपणन संघ (प्रस्तावित)’ का पंजीयन अभी तक लंबित है। संघ का कहना है कि इसका पंजीयन तत्काल किया जाए तथा विस्थापित मछुआरों की समितियों को इसका लाभ मिले।

ज्ञात हो कि राज्य मत्स्य महासंघ के नियंत्रण में वर्तमान में 7 बड़े और 19 मझोले मिलाकर कुल 26 जलाशय हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 2.29 लाख हेक्टेयर है।

संघ ने इन सभी मुद्दों पर मत्स्य कल्याण एवं मत्स्य विकास मंत्री, विभाग के प्रमुख सचिव और राज्य मत्स्य महासंघ के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन प्रेषित किया है। श्रमिक मछुआरा संघ का कहना है कि यदि इन न्यायोचित मांगों पर उचित कार्यवाही नहीं की गई, तो प्रदेश भर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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