भोपाल, 28 जून। भारत की भाषाई विविधता, विलुप्त होती बोलियों और मातृभाषाओं के भविष्य पर देश के सबसे प्रतिष्ठित भाषा-चिंतकों में से एक प्रो. जीएन डेवी 30 जून को भोपाल में व्याख्यान देंगे। ‘हम सब’ और गांधी भवन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस व्याख्यान का विषय है “भारत : भाषाओं की भूमिका”।
कार्यक्रम का आयोजन गांधी भवन, श्यामला हिल्स, भोपाल के मोहिनिया हॉल में शाम 5.30 बजे से शुरू होगा।
प्रो. जीएन डेवी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और दस्तावेजीकरण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाते हैं। उन्होंने पीपुल्स लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया (PLSI) का नेतृत्व किया, जिसके माध्यम से देश की 700 से अधिक जीवित भाषाओं और बोलियों का व्यापक दस्तावेज तैयार किया गया। यह सर्वे भारत की भाषाई विरासत को समझने और लुप्तप्राय भाषाओं को बचाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण पहलों में माना जाता है।
प्रो. जीएन डेवी साहित्यकार, सांस्कृतिक चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। वे आदिवासी समाज, घुमंतू समुदायों और उनकी भाषाओं के संरक्षण के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। इसी योगदान के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, प्रिंस क्लॉस अवॉर्ड, लिंग्वापैक्स पुरस्कार तथा पद्मश्री सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।
हम सब के राकेश दीवान ने बताया कि व्याख्यान में भारतीय भाषाओं के सामने मौजूद चुनौतियों, नई शिक्षा नीति, मातृभाषा की भूमिका, भाषाई असमानता और तेजी से लुप्त होती बोलियों पर विशेष चर्चा होगी। भाषा, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों के लिए यह संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह व्याख्यान सभी नागरिकों के लिए खुला है और आयोजकों ने भाषा, साहित्य, शिक्षा तथा संस्कृति से जुड़े लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है।


