Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Year: 2023

वन्‍य जीवन : जंगलराज में सभ्यता

पढे-लिखे आधुनिक समाज में जंगल को बर्बरता, असभ्यता और पिछडेपन का ऐसा प्रतीक माना जाता है जिसमें ‘सर्वाइवल ऑफ दि फिटेस्ट’ यानि ‘सक्षम की सत्ता’ ही एकमात्र जीवन-मंत्र है, लेकिन क्या सचमुच ऐसा ही है? जंगल को जानने-समझने वाले इसके…

अनुभव से आई एक किताब : ‘सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत’

झारखंड के मधुपुर इलाके में बरसों से गैर-दलीय राजनीतिक-सामाजिक कार्य में लगे घनश्याम ने हाल में अपने करीब आधी सदी के अनुभवों पर एक किताब लिखी है। जाहिर है, इसमें तरह-तरह के खट्टे-मीठे अनुभवों, विपरीत परिस्थितियों के साथ-साथ कठिन समय…

क्या यूपी में 2024 की तैयारियाँ प्रारंभ हो गईं हैं ?

यूपी में जो कुछ भी चल रहा है क्या उसे 2024 की तैयारियों के साथ जोड़कर भी देखा जा सकता है ? अगर ऐसा ही है तो आने वाले दिनों में और भी काफ़ी कुछ देखने-समझने की तैयारी रखना चाहिए…

प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) : बाघों के लिए घटते वन और वन्यप्राणी

प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) के 50 साल पूरे होने के मौके पर कर्नाटक के मैसूर में प्राानमंत्री ने देश में बाघों की संख्या के नए आंकड़े जारी किए। आंकड़ा जारी करते हुए उन्होंने बताया कि 2022 में भारत में बाघों…

समाचार स्‍वास्‍थ्‍य

सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर कर नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकार को सुरक्षित किये जाने की मांग

जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय-स्वास्थ्य समूह ने दिया छ: राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को ज्ञापन इंदौर । जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय-स्वास्थ्य समूह द्वारा छ: राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को ज्ञापन भेजकर प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर कर नागरिकों के…

झारखंड : खनिज की खातिर खत्म होती खेती

किसानों, आदिवासियों और खेती से जुडे अनेक लोगों के लिए आजकल विकास का मतलब उनके प्राकृतिक संसाधनों, खासकर जमीन की लूट हो गया है। आदिवासी राज्य झारखंड भी इससे अछूता नहीं है। झारखंड के एक इलाके में जमीन की मारामार…

आदिवासियों पर आधारित विकास : सच्ची खेती, सच्चा बचपन और सच्चा लोकतंत्र

स्थानीय ज्ञान, पडौस के संसाधन और समाज की देसी बनक के आधार पर विकास योजनाओं को रचा जाए तो नतीजा क्या, कैसा हो सकता है? इसे जानने के लिए भील आदिवासियों की ‘वागधारा’ जैसी संस्थाओं के काम पर नजर डालना…

गांधी दुनिया से कभी ख़त्म नहीं हो पाएँगे !

राष्ट्रपिता की एक बार फिर हत्या की जा रही है। पहले उनके शरीर का नाश किया गया। फिर उनके आश्रमों और उनकी स्मृतियों से जुड़े प्रतीकों पर हमला किया गया। अब उन्हें मुग़लों के साथ-साथ इतिहास और पाठ्यपुस्तकों से या…

स्मृति कुमार गंधर्व : सौ साल के स्वर

ऐसे समय में जब देश व प्रदेश के अधिकांश मीडिया संस्थान सदी के अप्रतिम गायक कुमार गंधर्व को उनके सौवें जन्म दिन पर लगभग विस्मृत कर चुके हो, उन्हें बेहद निजी रूप से याद करना एक कमाल ही है। प्रस्तुत…

नयी पेंशन योजना या पुरानी पेंशन योजना? क्या है असल कहानी?

दो दशक तक नई पेंशन योजना को आज़माने के बाद कई राज्य फिर से पुरानी की ओर जा रहे हैं। लाखों कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर जीवन की मांग कर रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार बार बार वित्तीय संकट का…