वन्यप्राणियों, पेड-पौधों और अपने आसपास की पारिस्थितिकी को जानते-बूझते, अकारण नुकसान पहुंचाना एक तरह की असभ्य हिंसा है और हम मानव इस कारनामे में अव्वल माने जा सकते हैं। क्या होगा, यदि ऐसा ही चलता रहा तो? जल, वायु और मृदा…