सत्ता और सरकारों के कर्ज-माफी सरीखे टोटकों को किसानों की नजर से देखें तो लगातार बढती किसान आत्महत्याएं दिखाई देती हैं। जाहिर है, किसानों और राज्य व केन्द्र की सरकारों के बीच गहरी संवादहीनता है। ऐसी संवादहीनता जिसमें सरकार की…
क्या केंद्र सरकार एक बार फिर “शाहीन बागों” का विरोध झेलने को तैयार है? या वह खुद ही किसानों को “शाहीन बाग” बनाने के लिए मजबूर कर रही है? और क्या किसान खुद इस तरह के लंबे और शांतिपूर्ण आंदोलन…