प्रधानमंत्री की अगुआई में देशभर में ‘आत्मनिर्भरता’ की दुंदुभी बज रही है। लगभग हरेक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की जुगत बिठाई जा रही है, लेकिन क्या मौजूदा विकास के ताने-बाने के साथ-साथ वास्तविक आत्मनिर्भरता संभव हो सकेगी? क्या इस आत्मनिर्भरता…
आज के राजनीतिक फलक को देखें तो विकास की मौजूदा अवधारणाओं और उसे लेकर की जाने वाली राजनीति ने भी कम्युनिस्टों को कमजोर किया है। तरह-तरह के विस्थापन-पलायन, जल-जंगल-जमीन की बदहाली और पर्यावरण-प्रदूषण के बुनियादी और सर्वग्राही सवाल आज भी…