बाजार-वाद के हल्ले में सरकारी अस्पतालों की तरह सरकारी स्कूलों को हम कितना भी गरिया लें, सर्वाधिक लोगों को स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा इन्हीं की मार्फत मिलती है। तो फिर इन्हीं को बेहतर क्यों नहीं किया जाए? खासकर तब, जब कोविड-19 की ‘मेहरबानी’ से…
4 अगस्त को हुए विस्फोट के बाद से लेबनान की जनता एक तरफ अपने शहर को बनाने, खड़ा करने में जुटी है तो दूसरी तरफ वहाँ के सत्ता वर्ग को चुनौती दे रही है। आंदोलन को हिंसा और दमन भी…
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की कुछ महीने पहले की भारत-यात्रा से परवान चढ़ी भारत-अमेरिकी के बीच खुले व्यापार समझौते की बातचीत, अब लगता है, अपनी मंजिल तक पहुंचने वाली है। लेकिन क्या यह समझौता भारत सरीखे तीसरी दुनिया के देश के हित…