तमाम अटकल-पच्चियों के बावजूद सवाल है कि क्या हमारा समाज आजादी के बाद के सबसे बडे पलायन को भोगने की तकलीफों को महसूस करना भी छोड़ चुका है? या फिर ‘पहचान,’ ‘धर्म’,’ ‘बहु-संख्यकवाद’ जैसी कोई और बात है जिसके चलते…
73वें ‘स्वतंत्रता दिवस’ (15 अगस्त) पर विशेष स्वाधीनता, स्वावलंबन और भय-मुक्ति मानव सभ्यता की बुनियाद हैं। इन्हें साधना, एक सम्पन्न समाज और सभ्यता के निर्माण के लिए बेहद जरूरी है। प्रस्तुत है, इसी विषय पर प्रकाश डालता अनिल त्रिवेदी का यह लेख। आज़ादी, स्वाधीनता, फ्रीडम, स्वतंत्रता…