गांधी दर्शन और विचार

गांधी की कस्तूरबा

ऐसा कहा और माना जाता है कि मोहनदास करमचंद गांधी के महात्मा गांधी में तब्दील होने का अधिकांश श्रेय उनकी पत्नी कस्तूरबा को जाता है। कैसा था, गांधी के संग-साथ का उनका जीवन? कैसे वे खुद कस्तूर बाई से बा…

पवनार आश्रम की साधिका देवी बहन का निधन, 12 वर्ष तक मैत्री स्थापना और स्त्री शक्ति हेतु की थीं पैदल यात्रा

वर्धा। भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे व्‍दारा स्‍थापित ब्रह्म विद्या मंदिर, पवनार (वर्धा) की साधिका सुश्री देवी बहन का 17 फरवरी 2022 को सुबह 8 बजे निधन हो गया। वे काफी दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं। देवी…

सांप्रदायिकता का बुखार बरकरार रखने के राजनीतिक-चुनावी खेल को देश अब समझने लगा है: गांधी संगठन

देश को प्रेम से जोड़े रखने के अपने काम में जुटे रहने की अपील वर्धा । 10 फरवरी । कर्नाटक से उठे बुरका-विवाद पर गांधी संगठनों – गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली और राष्ट्रीय युवा संगठन, वर्धा (महाराष्ट्र) ने बयान…

गांधी का धर्म और धर्म की राजनीति

आजकल महात्मा गांधी को सार्वजनिक तौर पर तरह-तरह से अपमानित करने का चलन हो गया है। मौजूदा सत्ता की शह पर गांधी को, उनकी धार्मिक मान्यताओं के लिए भी गरियाया जाता है। तो क्या गांधी के धार्मिक विश्वास तत्कालीन धार्मिक…

सुब्बरावजी से प्रेरणा लेकर देश में शांति, सदभाव और भाईचारे का माहौल निर्मित करते रहेंगे

अप्रैल में ‘हिंसा से अहिंसा का संदेश’ देने के लिये तीन बागी समर्पण स्‍थलों से शांति यात्राएं निकलेगी जौरा (मुरैना)। 7 फरवरी। चंबल घाटी के जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में विख्यात गांधीवादी स्व. डा. एस. एन. सुब्बरावजी की…

पाखंडी टोटकों की तरह वापरने और पूजने वाले महात्मा गांधी

संसद में बजट प्रस्तुत करने वाली देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पास इस सहज सवाल का कोई जबाव है कि देश के कुल 63 अमीरों के पास उन्हीं के पिछले साल पेश किए गए केन्द्रीय बजट से ज्यादा सम्पत्ति…

गांधी शहादत दिवस : गांधी को प्रासंगिक बनाते ‘अन्नदाता’

30 जनवरी : गांधी शहादत दिवस गांधी की शहादत के लंबे 74 सालों बाद भी हम यदा-कदा उनकी प्रासंगिकता को लेकर सवाल सुनते-उठाते रहते हैं, लेकिन गांधी हैं कि तरह-तरह से हमें अपनी मौजूदगी जता देते हैं। हाल का, दिल्ली…

पंचायती राज में गांधी की प्रासंगिकता

गांधी के नजरिए से मौजूदा लोकतंत्र की समीक्षा की जाए तो उसमें राज्य की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई ग्रामसभाएं और ग्राम-पंचायतें प्रमुखता से उभरती हैं, लेकिन धीरे-धीरे हमारे लोकतंत्र की बुराईयां गांव और उनके प्रशासनिक ताने-बाने तक पहुंच गई हैं।…

क्या देश में अब विस्मृत हैं गांधी

आचार्य राममूर्ति कर्मकांडों, मूर्तियों और खोखले ‘भजनों’ के बावजूद सब जानते हैं कि एक व्यक्ति और देश की हैसियत से हम गांधी को भूल गए हैं। यदि गांधी हमारे आसपास होते तो आज हमारी ऐसी आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक…

‘फैशनेबल’ गांधी : टाई-सूट से लंगोट तक

अपने समय की जरूरतों के मुताबिक विशिष्ट रहन-सहन को फैशन माना जाए तो महात्मा गांधी सर्वाधिक प्रासंगिक दिखाई देते हैं। इंग्लेंड, दक्षिण-अफ्रीका और भारत के अपने भिन्न-भिन्न जीवन काल में वहां की जरूरतों के अनुसार अपना वस्त्र-विन्यास बदलने वाले गांधी…