गांधी दर्शन और विचार

गाँधी की गहराई

इतिहास के इस दौर में गांधी और उनके विचार सर्वाधिक आलोचना और समीक्षा झेल रहे हैं। शायद यह इसलिए भी है कि आज दुनियाभर को गांधी को अनदेखा कर पाना कठिन हो गया है। बीसवीं और इक्कीसवीं सदी में दुनिया…

दस्यु आत्‍मसमर्पण स्‍थली जौरा (मुरैना) में होगा अखिल भारतीय सर्वोदय समाज का 48 वां सम्मेलन

सम्‍मेलन का घोषवाक्य  होगा ‘शांति और न्याय के लिए युवा’ जौरा, मुरैना (म.प्र.)। 48 वें अखिल भारतीय सर्वोदय समाज सम्मेलन का आयोजन 14, 15,16 अप्रैल 2022 को जौरा (मुरैना) में होने जा रहा है। दारूण कोरोना काल की भीषण त्रासदी के दो…

भगत सिंह की फांसी और महात्मा गांधी

महात्मा गांधी भी न केवल फांसी की सजा के विरोध में थे, वरन उन्होंने हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त, क्रांतिकारियों, नजरबंद लोगों की रिहाई की मांग लार्ड इरविन से की, जिन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने बिना मुकदमा चलाए, बिना अभियोग लगाए या…

गांधी का ‘नमक सत्याग्रह’: शक्ति के खिलाफ अधिकार की लडाई

बॉम्बे सर्वोदय मंडल और गांधी रिसर्च फॉउन्डेशन अभी 12 मार्च को गुजरी 92 वीं सालगिरह के बाद, आज भी ‘नमक सत्याग्रह’ हमारे इतिहास के उस मोड की याद दिलाता है जिसने आजादी के अहिंसक आंदोलन को एक नई जीवनी प्रदान…

वरिष्‍ठ गांधी विचारक जयवंत मठकर नहीं रहे, सर्वोदय समाज ने एक सजग और सहज कार्यकर्ता खो दिया

वर्धा। सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान के पूर्व अध्यक्ष जयवंत गंगाराम मठकर का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे पिछले दो महीने से बीमार थे। उन्होंने सोमवार 14 मार्च 2022  को पुणे में अंतिम सांस ली, मंगलवार सुबह…

एक मुट्ठी नमक से हिल गया था ब्रिटिश साम्राज्यवाद

92 वां दांडी मार्च दिवस दांडी मार्च से अभिप्राय उस पैदल यात्रा से है, जो महात्मा गाँधी और उनके स्वयं सेवकों द्वारा 12 मार्च, 1930 को प्रारम्भ की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य था- “अंग्रेज़ों द्वारा बनाये गए ‘नमक क़ानून…

भारत यूक्रेन को बचाने के लिए सहयोग करें, यूक्रेन के राजदूत डॉ. आइगर पोलिखा की अपील

नईदिल्‍ली 4 मार्च । राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय राजघाट में आज यूक्रेन के राजदूत एवं यूरोप के अनेक देशों के राजदूत तथा उनके परिवार के सदस्यगण सर्वधर्म प्रार्थना सभा में शामिल हुए। प्रार्थन सभा के पश्‍चात यूक्रेन के राजदूत डॉ. आइगर…

‘आखिरी आदमी’ के लिए बापू का आहार

आजकल स्वास्थ्य, संतुलित भोजन और वजन-वृद्धि बडा बाजार हैं और उन्हें लेकर तरह-तरह के कौतुक होते रहते हैं। गांधी ने भी अपने और अपने संगी-साथियों के लिए भोजन की एक पद्धति विकसित की थी जिसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण था, समाज के…

गांधीजी की प्रतिमा खंडित करने की घटना पर प्रधानमंत्री को लिखा संस्‍थाओं ने खुला पत्र

एक सौ से अधिक रचनात्‍मक संस्‍थाओं और व्‍यक्तियों ने की हस्‍तक्षेप करने की मांग देश के विभिन्न जन आंदोलनों, संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अमन-प्रेमी आम नागरिकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर पिछले कुछ समय…

जो तोड़ने से भी न टूटे वह गांधी है

गांधी सामयिक हैं, यह बात नारों-गीतों-मूर्तियों-समारोहों-उत्सवों से नहीं, समस्याओं के निराकरण से साबित करनी होगी. जो गांधी को चाहते व मानते हैं उनके लिए गांधी एक ही रास्ता बना व बता कर गए हैं : अपने भरसक ईंमानदारी व तत्परता…