आजकल चहुंदिस फैले राष्ट्रवाद में भारत–माता को देखें तो क्या दिखाई देगा? क्या अपने आसपास का संसार वैसा ही खाता-अघाता, चमकदार है जैसा एक जमाने की फिल्मों में यदा-कदा दिखाया जाता था? या फिर हमारी भारत-माता के ऐसे भी असंख्य…
अपने सीमित संसाधनों से अपनी खेती बागबानी बचाने वाले बहुत छोटे- छोटे किसान महिलाएं अपेक्षित सरकारी सहायता न मिलने और नीतिगत मामले में घोर लापरवाही के कारण नीति नियंताओं से बेहद नाराज़ हैं। उनका मानना है कि वे अपनी मांगों…
जौरा में तीन दिवसीय बागी आत्मसमर्पण स्वर्ण जयंती समारोह का समापन जौरा मुरैना। 16 अप्रैल। बागी आत्मसमर्पण की स्वर्ण जयंती समारोह के समापन अवसर पर यहां विगत तीन दिनों में हुई चर्चाओं के आधार पर तय किया गया कि परिवार,…
दस्यु आत्म-समर्पण में विनोबा भावे के बाद जयप्रकाश नारायण की प्रेरणा और अगुआई सर्वाधिक महत्वपूर्ण रही है। उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश में फैली डाकुओं की समस्या के निदान को लेकर जेपी क्या सोचते थे? उनके मुताबिक आतंक और हिंसा की…
बागी आत्मसमर्पण की स्वर्ण जयंती समारोह : दूसरा दिन जौरा। 15 अन्रैल। आदिवासी क्षेत्रों में स्वावलम्बन का कार्य चुनौतीपूर्ण रहा है। एकता परिषद के प्रयासों से भूमि अधिकार अभियान में वंचित समुदाय को भूमि के अधिकार से समाज अनाज के मामलों…
चंबल घाटी की दस्यु समस्या के समाधान के लिए जो काम सरकारें सदियों से नहीं कर पाई वह कार्य सर्वोदय कार्यकर्ता करने में सफल रहे। मैत्री से ही मिटे बैर को बाबा विनोबा तथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में…
अपमान, विरोध, उपहास के बाद भी गांधी ने सत्यधर्म नहीं छोड़ा-कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर बागी आत्मसमर्पण की 50वीं वर्षगांठ समारोह शुभारंभ जौरा, मुरैना 14 अप्रैल ।न्याय व शांति के लिए गांधी के तीन सूत्र ‘चलो शहर से गांव की…
बागी समर्पण स्थल जौरा में देश भर आये नवजवानों ने की सर्वधर्म प्रार्थना जौरा, मुरैना। 13 अप्रैल । चम्बल घाटी का जौरा हिंसा मुक्ति, प्रतिकार मुक्ति और शोषण मुक्ति के अभियान की जननी रही है। जहां पर 1970 के दशक…
पूंजी के शिखर पर विराजी, शीतल-पेय बनाने वाली कंपनी ‘पेप्सीको’ की सीईओ इंद्रा नूई ने हाल में अपने एक साक्षात्कार में लगभग उन्हीं चिंताओं को साझा किया है जिनके बारे में महात्मा गांधी लगातार चेतावनी देते रहते थे। फर्क सिर्फ…
जौरा में बागी आत्मसमर्पण स्वर्ण जयंती समारोह शुरू 11 अप्रैल 2022 जौरा, मुरैना। चम्बल में हुए आत्मसमर्पण से सामाजिक सम्मान की प्राप्ति और शोषण मुक्त समाज की रचना का संदेश पूरी दुनिया में गया था और 654 बागियों ने अच्छी…