पवनार आश्रम की साधिका देवी बहन का निधन, 12 वर्ष तक मैत्री स्थापना और स्त्री शक्ति हेतु की थीं पैदल यात्रा

वर्धा। भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे व्‍दारा स्‍थापित ब्रह्म विद्या मंदिर, पवनार (वर्धा) की साधिका सुश्री देवी बहन का 17 फरवरी 2022 को सुबह 8 बजे निधन हो गया। वे काफी दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं। देवी रिझवानी इंदौर के एक समृद्ध परिवार से थीं और अपने सुस्थापित अकादमिक करियर को छोड़कर विनोबा के पास आई थीं। अपना पूरा जीवन उन्होंने महिला शक्ति की जागृति और सत्य साधना में व्यतीत किया। इंदौर में समाजशास्त्र की प्राध्यापिका की नौकरी छोड़ कर वह विनोबाजी के कार्य में जुट गई थी।

देवी बहन उन चार लोकयात्री बहनों में से थीं, जिन्होंने आचार्य विनोबा भावे के आशीर्वाद से 12 वर्ष तक दुनिया की पैदल यात्रा मैत्री स्थापना और स्त्री शक्ति के निमित्त की थीं। 25 अक्तूबर, 1967 को देवी अहिल्या की भूमि इंदौर के कस्तूरबा ग्राम से ये चारों महिलाएँ ‘लोकयात्रा’ पर निकल पड़ीं। 12 वर्ष तक ये महिलाएँ संपूर्ण भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका आदि की पदयात्रा करके महिला जागृति की अलख जगाती रहीं। ठीक 12 वर्ष बाद, यानी 25 अक्तूबर, 1979 को वे विनोबा के पास पवनार पहुँच गईं। विनोबा ने उनके स्वागत में ‘विश्व महिला सम्मेलन’ का आयोजन करने को कहा। इसमें भारत के सभी प्रांतों से और दुनिया के 18 देशों से बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। विनोबा ने इसमें महिलाओं को शांति सैनिक बनने को कहा और इसके लिए सात प्रतिज्ञाएँ करने का आह्वान किया जिनकी चर्चा फिर कभी।

उल्‍लेखनीय है कि ब्रम्‍ह विद्या मंदिर में बहुत ही सादा जीवन व्यतीत करने वाले अनुयायी निवासरत हैं। विनोबा के आश्रम का सारा काम उनकी शिक्षाओं के अनुरूप किया जाता है। इस आश्रम में कोई मुखिया नहीं है। सबका समान अधिकार है। आश्रम में विनोबा की शिक्षाओं और आत्मनिर्भरता का सख्ती से पालन किया जाता है। यह मंदिर सामूहिक साधनों का केंद्र है। आचार्य विनोबा भावे ने गीताई, भूदान आंदोलन, सर्वोदय आंदोलन, महात्मा गांधी दर्शन, वैदिक-उपनिषद ध्यान, सामूहिक साधना, जीवन में विभिन्न प्रयोग, वैज्ञानिक भूमिका के माध्यम से भारतीय दर्शन को रेखांकित किया था। इस सभी कार्यक्रमों में साधिकाओं का महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है।

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उनके परिवार से दोनों भतीजियां पवनार आश्रम गत कई दिनों पूर्व उनके पास पहुंच चुकी थी। उनके बीमारी के दिनों में आश्रम की बहनों ने उनकी बहुत सेवा सुश्रुषा की। देवी बहन का अंतिम संस्कार आज ब्रह्मविद्या मंदिर पवनार के परिसर में संपन्न हुआ। सप्रेस परिवार देवी बहन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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