समसामयिक

विचार : भाषा की भद्द पीटने वाले चुनाव  

क्या भाषा की बरबादी में राजनीतिक नेतृत्व, खासकर सत्तानशीन नेतृत्व की भी कोई भूमिका होती है? आपस के बहस-मुबाहिसों से लगाकर चुनावी सभाओं तक में जिस अदा से जैसी भाषा का उपयोग किया जाता है वह उसे लगातार गर्त में…

लेबर कोड अधिसूचना पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की तीखी प्रतिक्रिया, 26 नवंबर को देशव्यापी प्रतिरोध का आह्वान

नईदिल्‍ली, 25 नवंबर। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच ने 21 नवंबर से लागू किए गए इन श्रमिक-विरोधी और पूँजीपति-परस्त लेबर कोड्स की एकतरफा और मनमानी घोषणा की कड़े शब्दों में निंदा की है। और इसे देश के मेहनतकशों के…

लेबर कोड 2025 : श्रमिक गरिमा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक मोड़

लेबर कोड 2025 केवल कानून में बदलाव नहीं, बल्कि भारत के श्रम परिदृश्य में संरचनात्मक सुधार की शुरुआत है। न्यूनतम वेतन की एकरूपता, स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों के लिए नई गारंटियाँ—इन सबके बावजूद असली…

कॉरिडोर में कृष्ण : ‘कुंज गलियों’ का पर्यटन

धर्मांध भीड को अपने कर्मकांडों की खातिर ज्यादा जगह की जरूरत होती है और इस तर्क पर आजकल देशभर के प्राचीन धार्मिक स्थलों को भव्य ‘लोक’ में तब्दील करके उन्हें विस्तार दिया जा रहा है। अयोध्या, बनारस, प्रयागराज, उज्जैन आदि…

डिजिटल हमलों से डरती महिलाएं

शारीरिक और यौन हिंसा से अक्सर निपटने वाली महिलाओं के सामने ‘डिजिटल हिंसा’ के रूप में अब एक नया ‘जानवर’ खड़ा हो गया है। विडंबना यह है कि आमतौर पर अदृश्य इस जानवर से निपटने के लिए कोई प्रभावी हथियार…

विकास की दौड़ में खोती प्रकृति की सांसें

प्रकृति से बढ़ती दूरी अब केवल भावनात्मक संकट नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न बन चुकी है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अध्ययन के अनुसार, प्रकृति से अलगाव पर्यावरणीय विनाश का मूल कारण है। औद्योगिकीकरण और शहरीकरण ने विकास तो दिया, पर…

सनातन जीवन-दर्शन : प्रकृति और संस्कृति से जुड़ी जीवन पद्धति

भारतीय जीवन-दर्शन का मूल प्रकृति और संस्कृति के उस सनातन योग में निहित है, जिसने पंचमहाभूतों से सृष्टि की रचना की और मानव जीवन को आचार-विचार, आरोग्य, संतुलन व समृद्धि का मार्ग दिया। जैसे-जैसे यह योग टूटता गया, आर्थिकी, पारिस्थितिकी…

बच्चों की हंसी में ही बसता है भारत का भविष्य

बच्चों के प्रति अपने स्नेह और विश्वास के कारण पंडित जवाहरलाल नेहरू भारतीय बाल-चेतना के सबसे बड़े संरक्षक माने जाते हैं। उनके जन्मदिवस 14 नवम्बर का ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाना इसी भावना का प्रतीक है। नेहरू का…

जवाहरलाल नेहरू का भारत : आजादी, लोकतंत्र और विश्वबंधुत्व का सफर

पंडित जवाहरलाल नेहरु भारत के स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे प्रखर नायक थे जिन्होंने न केवल आजादी की लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाई, बल्कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक नींव, औद्योगिक आधार और वैश्विक पहचान को भी मजबूत किया। विश्वशांति, गुटनिरपेक्षता और…

सोने का धुंधलका, डालर का सच : सत्ता की राजनीति के साये में अर्थव्यवस्था

देश की राजनीतिक हलचल और चुनावी बयानबाजी के बीच मुद्रा बाजार में गंभीर उतार-चढ़ाव नजर आ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपये की तेज गिरावट और सोने के भंडार को लेकर उठे सवालों पर न तो स्पष्ट संवाद हो रहा…